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पावर कारपोरेशन के पूर्व MD एपी मिश्रा को इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत


🗒 शनिवार, जुलाई 17 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
पावर कारपोरेशन के पूर्व MD एपी मिश्रा को इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत

लखनऊ,। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यूपीपीसीएल के पीएफ घोटाले मामले में पूर्व एमडी अयोध्या प्रसाद (एपी) मिश्र को उनकी 70 वर्ष की उम्र व सेहत खराब रहने के आधार पर जमानत दे दी है। कोर्ट ने इस आधार पर भी संज्ञान लिया कि मिश्र दो साल से जेल में हैं, लेकिन सीबीआइ अब तक घोटाले की रकम की खोज खबर नहीं कर पाई है और न ही अभी तक उनके खिलाफ आरोप पत्र ही पेश कर पाई है।जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश एपी मिश्र की दूसरी जमानत याचिका को मंजूर करते हुए पारित किया। मिश्र की पहली जमानत अर्जी हाई कोर्ट ने अप्रैल, 2020 में खारिज कर दी थी, जिसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट गए थे। वहां से जमानत अर्जी तो खारिज कर दी गई, लेकिन उम्र व बीमारी के आधार पर उन्हें पुन: हाई कोर्ट में जमानत अर्जी पेश करने की छूट दे दी गई, जिसके बाद मिश्रा ने हाई कोर्ट में दूसरी जमानत अर्जी लगायी थी। इस पर दिए आदेश में हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि इस केस के किंग पिन (मुख्य किरदार) अभिनव गुप्ता व एक अन्य अभियुक्त को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।कोर्ट ने आदेश में कहा कि सीबीआई मामले की जांच पिछले दो साल से कर रही है। अभियुक्त 70 वर्ष का है और हृदय रोग के अलावा अन्य तमाम बीमारियों से ग्रसित है। कोर्ट ने कहा कि पीएफ की रकम को पीएनबी हाउसिंग, एलआइसी हाउसिंग व डीएचएफएल में निवेश करने के लिए अधिकृत करने के सिवा अब तक उसके खिलाफ कोई भी दस्तावेजी साक्ष्य इस घोटाला मामले में शामिल होने का नहीं आया है। सह-अभियुक्त अभिनव गुप्ता ने निवेश के लिए 30 करोड़ रुपये का कमीशन देने की बात जांच एजेंसी के समक्ष कुबूल की है, लेकिन इस कमीशन की रकम के मनी ट्रेल का भी अब तक कुछ पता नहीं लग सका है। वहीं कोर्ट ने सीबीआई के अधिवक्ता से यह भी पूछा कि वह मामले की विवेचना कब तक पूर्ण कर लेगी। इस पर सीबीआई के अधिवक्ता अनुराग सिंह ने सितंबर तक विवेचना पूरी होने की संभावना जताई है। हाई कोर्ट ने बीती 13 जुलाई को मिश्र को जमानत पर जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। हालांकि याची को ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपना पासपोर्ट जमा करने का भी आदेश दिया गया है।उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन के कर्मियों की पीएफ की धनराशि को कहीं अन्य जगह पर निवेश करने के घोटाले के मामले में एपी मिश्रा को यूपी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने नवंबर 2019 में गिरफ्तार किया था। इसके बाद इस मामले में सीबीआइ ने पांच मार्च को केस दर्ज करने के बाद इस प्रकरण की जांच अपने हाथ में ले ली थी। अब जमानत मिलने के बाद एपी मिश्रा को सीबीआई कोर्ट में अपना पासपोर्ट सरेंडर करना होगा। एपी मिश्रा ने बीते वर्ष मई में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए कहा था। इस घोटाले में तत्कालीन वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी व ट्रस्ट सचिव पीके गुप्ता को भी और पूर्व एमडी एपी मिश्र के साथ गिरफ्तार किया गया था। एपी मिश्रा की जमानत अर्जी कई बार खारिज हो गई थी।उत्तर प्रदेश स्टेट पावर सेक्टर एम्पलाइज ट्रस्ट के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में 21 अप्रैल, 2014 को कर्मचारियों के जीपीएफ और सीपीएफ का पैसा ज्यादा ब्याज देने वाले फाइनेंशियल कॉरपोरेशन में लगाने का फैसला हुआ है। उस समय एमडी एपी मिश्रा थे। इसके बाद मार्च, 2017 से लेकर दिसंबर, 2018 तक तत्कालीन सचिव, ट्रस्ट पीके गुप्ता और निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी की मंजूरी पर दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) में निवेश किया जाता रहा। इन दोनों अधिकारियों को पता था कि डीएचएफएल वाणिज्यिक बैंक की श्रेणी में नहीं आता है। इसमें एपी मिश्रा भी दोषी पाए गए थे। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपेरेशन का बड़ा घोटाला नवंबर 2019 में उजागर हुआ था। बिजली कर्मचारियों के भविष्य निधि के 2,268 करोड़ रुपये बिजली विभाग ने जिस डीएचएफएल में लगाया था। इसकी जांच ईडी समेत कई एजेंसियां कर रही थी।