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राष्ट्रीय महासचिव के सामने आई पुराने कांग्रेसियों की टीस


🗒 रविवार, जुलाई 18 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
राष्ट्रीय महासचिव के सामने आई पुराने कांग्रेसियों की टीस

लखनऊ , उत्तर प्रदेश में प्रभारी के तौर पर जिम्मेदारी संभालते ही राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा ने कांग्रेस के पत्ते सिरे से फेंट डाले। लगभग सारे अध्यक्ष बदलकर नया संगठन खड़ा कर दिया। इस 'युवा जोश' के साथ पार्टी अभी चुनावी मैदान उतरी भी नहीं कि काम के पहले उनके व्यवहार ने पुराने कांग्रेसियों को आहत कर दिया। चुनावी रणनीति के लिए प्रियंका ने पूर्व जनप्रतिनिधि और पूर्व जिला-शहर अध्यक्षों के साथ बैठक की तो टीस बाहर आ गई। अधिकतर की शिकायत थी कि नए अध्यक्ष तो पुरानों को पूछते ही नहीं। हालांकि, प्रदेश प्रभारी ने डैमेज कंट्रोल क प्रयास किया है। सम्मान का भरोसा दिलाकर तालमेल बिठाने की सलाह दी है।लगभग डेढ़ वर्ष बाद लखनऊ आईं प्रियंका वाड्रा शनिवार सुबह तो लखीमपुर के पसगंवा ब्लाक पहुंचीं। वहां ब्लाक प्रमुख प्रत्याशी की उस महिला प्रस्तावक से मिलीं, जिसकी साड़ी खींची गई। वहां भाजपा सरकार पर गरजने-बरसने के बाद राष्ट्रीय महासचिव प्रदेश मुख्यालय लौट आईं। यहां पार्टी के पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व जिला और शहर अध्यक्षों के साथ बैठक की। पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के लगातार उलाहनों के बीच प्रियंका ने इन पुराने कार्यकर्ताओं को मिशन-2022 में जुटने का आव्हान किया।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पूर्व जिला और शहर अध्यक्षों को ज्यादा शिकायत थी। उनका कहना था कि नए जिला और शहर अध्यक्ष उन्हें पूछते ही नहीं। वह अपना अपमान महसूस कर रहे हैं। खुद प्रियंका से न मिल पाने की पीड़ा भी कुछ कार्यकर्ताओं ने जाहिर की। इस पर प्रियंका ने समझाया कि विधानसभा चुनाव जीतना है तो आपस में तालमेल बनाना होगा। अनुभव का सम्मान होना ही चाहिए। कुछ अध्यक्षों से गलती हो गई होगी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और यूपी देख रहे सभी राष्ट्रीय सहित वह खुद देखेंगी कि पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा न हो। साथ ही वरिष्ठ पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वह जब भी लखनऊ आएं, तब विधानसभावार पूर्व सांसद-विधायक, पूर्व जिला-शहर अध्यक्ष आदि से मुलाकात कराई जाए।कांग्रेस की साख पुश्तैनी सीट यानी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली और अमेठी से जुड़ी है। अमेठी का लोकसभा चुनाव राहुल गांधी 2019 में हार चुके हैं। इधर, रायबरेली में भी कांग्रेस लगातार कमजोर होती महसूस हो रही है। उनके पार्टी के नेता टूटकर भाजपा के साथ हो गए। ऐसे में प्रियंका को भी इन दो जिलों की खास तौर पर ङ्क्षचता है। यही वजह है कि अमेठी और रायबरेली के ब्लाक अध्यक्षों के साथ अलग से बैठक कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की।प्रियंका ने बैठकों में इस बात पर काफी जोर दिया कि न्याय पंचायत तक गठित संगठन के बाद जल्द ही ग्राम पंचायत स्तर तक संगठन को मजबूत किया जाए। कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए बोलीं कि कोरोना में आप लोगों ने महत्वूपूर्ण भूमिका निभाई। पिछले डेढ़ साल में कांग्रेस ने सभी के लिए आवाज उठाई। सड़क पर कोई पार्टी आई तो वह सिर्फ कांग्रेस ही है। इसी तरह प्रदेश मुख्यालय में उपस्थित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोग पार्टी के मजबूत सिपाही हैं। हम सबको एकजुट होकर एक सेना की तरह काम करते हुए फिर से तिरगे झंडे को लहराना है। प्रदेश अध्यक्ष लल्लू ने सभी पदाधिकारियों को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम को नेता विधानमंडल दल आराधना मिश्रा और पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी ने भी संबोधित किया।