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प्रशासन की उदासीनता के कारण गंदगी का अंबार दे रहा है संक्रमण दर को बढ़ावा


🗒 रविवार, सितंबर 05 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
प्रशासन की उदासीनता के कारण गंदगी का अंबार दे रहा है संक्रमण दर को बढ़ावा

राजेश मिश्रा लखनऊ

लखनऊ - नगर पंचायत मोहनलालगंज की लापरवाही से फैल रहा है संक्रमण का खतरा,गंदगी का अंबार दे रहा है कई खतरनाक बीमारियों को न्योता मोहनलालगंज जहां कोरोना वैश्विक महामारी से आम जनमानस त्रस्त हो चुका है तो वही बरसात के मौसम में बरसात का पानी भी कई जगह एकत्रित होने से संक्रमण दर को बढ़ावा दे रहा है।जी हां आपको बताते चलें कि मोहनलालगंज नगर पंचायत तहसील से चंद कदम दूरी पर मोहनलालगंज क्रॉसिंग के आगे गोसाईगंज रोड मधुबन मार्केट के पास गंदगी का ढेर अन्य बीमारियों को न्योता दे रहा है। जहां पर बरसात के मौसम में नालियों से लेकर सड़कों तक बरसात का पानी जमा होने के कारण गंदगी का अंबार देखने को मिल रहा है। जहां गंदगी के कारण उस गली से निकलने वाले मुसाफिर भी अपना दम घुटने पर मजबूर हो रहे हैं लापरवाही नगर पंचायत की और से है जहां पर ना तो साफ सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है। और ना ही कूड़े के अंबार को खत्म किया जा रहा है गोसाईगंज रोड पर जल निकासी की व्यवस्था ना होने पर,जल का जमाव देखने को मिला! जहां पर कूड़े के ढेर भी दिखाई पड़े! सूत्रों के हवाले माने तो वहां के मुसाफिर जब भी उस गली से निकलते हैं तो उनको बदबूदार गंदगी से गुजारना पड़ता है। साथ ही गंदगी का जमावड़ा होने के कारण कई सारी बीमारियां भी उत्पन्न हो रही जैसे कि चिकनगुनिया डेंगू के साथ-साथ मलेरिया सर्दीया बुखार जैसी अन्य बीमारी भी वहां से गुजरने वाले मुसाफिरों पर काल बनकर टूट रही है।जहां उत्तर प्रदेश में स्वच्छ भारत अभियान चलाया जा रहा है तो वही उत्तर प्रदेश की राजधानी का ही यह हाल है की साफ सफाई क्या जहां तक जल निकासी का भी प्रबंध नहीं करवाया गया। ऐसे लापरवाह प्रशासन, सरकार की योजनाओं पर पानी फेर रहा है!प्रशासन आंख बंद कर यह प्रदर्शित करने में जुटा हुआ है की उसका क्षेत्र स्वच्छ भारत मिशन के अभियान में भागीदारी निभा रहा है।किंतु समक्ष देखने पर असलियत कुछ और ही बयां हो रही है जिससे यह साफ पता चलता है की गंदगी का अंबार राजधानी में भी पैर पसारे हुए है। जिससे आम जनमानस कई खतरनाक बीमारियों से जूझ रहे है।अगर ऐसा हाल नगर पंचायत का है।तो गांव के क्या हाल होंगे! यह एक विचारणीय तथ्य बन चुका है प्रशासन के ऊपर कि आखिर कब तक प्रशासन के आला अधिकारी मूकदर्शक बने बैठे रहेंगे