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नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से ठगी


🗒 रविवार, अक्टूबर 03 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से ठगी

लखनऊ, । नौकरी दिलाने के नाम पर सैकड़ों बेरोजगारों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्जीय गिरोह के तीन जालसाजों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरोह के लोग सिक्योरिटी कंंपनी, निजी कंपनी और दवा कंपनी में नौकरी दिलाने का झांंसा देकर बेरोजगारों से ठगी करते थे। जालसाजों का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली और राजस्थान में भी फैला था। इंस्पेक्टर गुडंबा मो. अशरफ के मुताबिक गिरफ्तार जालसाजों में गाजीपुर दुल्लहैपुर धर्मागतपुर निवासी श्रवण कुमार, औरैया के करताबतू का अजय कुमार और बलिया भीमपुरा महाराजपुर निवासी मनोज कुमार है। इनके पास से बड़ी संख्या में दस्तावेज, निजी कंपनियों के नाम से प्रिंट किए हुए आवेदन फार्म, ज्वाइनिंग लेटर, कई कंपनियों के एमओयू व अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं।गिरोह के लोग बस-रेलवे स्टेशन, बाजारों और शैक्षिक संस्थानों के आस पास पंफलेट लगवाते थे। उस पर पहली लाइन यही लिखी होती थी कि नौकरी चाहिए तो हमारे पास आएं। इसके बाद नीचे मोबाइल नंबर पड़े होते थे। मोबाइल पर जब बेरोजगार संपर्क करते तो उन्हेंं अपने आफिस बुलवाते। आफिस में उन्हेंं सिक्योरिटी गार्ड, दवा कंपनी समेत अन्य कंपनियों में मार्केटिंग की नौकरी दिलाने का दावा करते थे।इंस्पेक्टर ने बातया कि गिरोह के लोग बेरोजगारों से रजिस्ट्रेशन से लेकर आवेदन और दस्तावेज तैयार कराने के नाम पर एक से 10 हजार रुपये तक वसूलते थे। लोगों के 20 से 50 हजार रुपये तक की नौकरी का आश्वासन देते थे। इन्होंने दिल्ली, राजस्थान में भी अपने आफिस खोल रखे थे। बीते दिनों श्रवण कुमार और ललितपुर के प्रदीप पांचाल ने उक्त लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। उसके बाद से सर्विलांस और अन्य टीमें लगाकर इनकी लोकेशन पता लगाने के साथ ही गिरफ्तारी के प्रयास जारी थे।गिरोह के लोग फर्जी नियुक्तिपत्र देकर बेरोजगारों को नौकरी लग गई है ऐसा कहकर दिल्ली और अन्य प्रदेशों में भी भेज देते थे। जब वह वहां पर पहुंचते तो उस पते पर या तो कंपनी ही नहीं होती थी। या फिर नियुक्तिपत्र फर्जी होने की उन्हें जानकारी होती। इसके बाद पीड़ित आफिस पहुंचता तो वहां फिर उसके साथ टाल मटोल करते और समझा-बुझाकर शांत करा देते। जब एक शहर में ठगी के शिकार लोगों की संख्या अधिक हो जाती तो वहां से दूसरे शहर चल देते थे।

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