सीएम को ज्ञापन भेज दुकानदारो के बिजली बिल माफ करने की करी मांग

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सीएम को ज्ञापन भेज दुकानदारो के बिजली बिल माफ करने की करी मांग


🗒 रविवार, मई 16 2021
🖋 रजत तिवारी, बुंदेलखंड सह संपादक बुंदेलखंड
सीएम को ज्ञापन भेज दुकानदारो के बिजली बिल माफ करने की करी मांग


- कोरेाना काल मंे दुकानदारी ठप्प होने को लेकर दुकानदारो ने उठायी आवाज
- सीएम को भेजे मांग पत्र में मिनिमम सरचार्ज की अपेक्षा यूनिट के आधार पर बिल के भुगतान करवाने की करी मांग
महोबा। कोरोना महामारी से लोगो को सुरक्षित रखने के लिए तथा तेजी से फैल रहे कोरोना के संक्रमण की चैन को तोड़ने के लिए प्रदेश में आंशिक लाॅकडाउन लगाया गया है। जिसके प्रति दुकाने प्रतिष्ठान, संस्थान आदि को बन्द किया गया। मात्र आवश्यक वस्तुओ की आपूर्ति वाली दुकानो को समय के आधार पर ही खेालने की अनुमति दी गई। तथा बाकी की दुकानो को पूर्ण रूप से बन्द करने की हिदायद दी गई है। प्रदेश के करोड़ों बड़े, मध्यमवर्गीय व छोटे-लघु व्यापारियों को हो रही समस्याओं व उनके जीवन यापन में कठिनाइयों को देखते हुए समाजवादी व्यापार सभा ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर विभिन्न मांगों के निस्तारण की मांग की है। समाजवादी व्यापार सभा के जिलाध्यक्ष संतोष साहू ने ज्ञापन में कहा कि शासन प्रदेश के सभी दुकानदारों के अप्रैल व मई 2021 माह के बिजली बिल माफ करे, उद्योगों की कॉमर्शियल बिजली मीटर पर फिक्स्ड दर (मिनिमम चार्जेस) की जगह असल में हुई बिजली खपत का बिल लिया जाए, जीएसटी पंजीकृत, मंडी शुल्क देने वाले, रेहड़ी-ठेले में पंजीकृत सभी व्यापारियों, दुकानदारों, आदि को मुफ्त मेडिक्लेम बीमा की सुविधा उपलब्ध कराई जाये। कोरोना की वजह से मृत्यु होने पर जीएसटी, मंडी परिषद या किसी भी विभाग में पंजीकृत व्यापारी सरकार साथ ही साथ अपंजीकृत व्यापारी जैसे कि ठेले वाले,पटरी वाले व रेहड़ी वालों की भी मृत्यु होने पर परिवार को 10 लाख का मुआवजा दिया जाये, मजदूरों व कमजोर वर्ग की तरह ठेले, पटरी, रेहड़ी वालों को भी शासन मुफ्त राशन की व्यवस्था करे, दुकान खुली मिलने पर पुलिस द्वारा व्यापारियों से अमानवीय व्यवहार की शिकायतें आ रही हैं। सरकार सुनिश्चित करे की किसी भी व्यापारी व आमजन के साथ भी अमानवीय व्यवहार न हो, लॉकडाउन में व्यापारी को हफ्ते में दो दिन दुकान की सफाई व जरूरी कागजात निकालने की अनुमति दी जाए। सभी विभागों के रिटर्न्स दाखिल करने की अवधि बढाई जाए, प्रदेश सरकार एनपीए की अवधि 90 दिन की जगह 180 दिन तथा व्यापारिक ऋण पर अप्रैल व मई माह का ब्याज माफ करने तथा बैंकों की किश्त पर मोराटोरियम की सुविधा देने का केंद्र सरकार से आग्रह करे।

 

 

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