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इलाज के बदले हर दर से मिली दुत्कार मां रही अनजान गोद में बेटी हुई वेजान


🗒 सोमवार, अक्टूबर 07 2019
🖋 मनीष कुमार, रिपोर्टर अलीगढ
इलाज के बदले हर दर से मिली दुत्कार मां रही अनजान गोद में बेटी हुई वेजान

मैनपुरी-बुखार से कॉप रही अपनी मासूम बेटी को दवा दिलाने के लिए एक बेचारी मां कभी लाइन में लग जाती तो कभी डॉक्टर के चेंबर तक पहुंच जाती मगर दवा के बजाय उसे हर तरफ से दुत्कार ही मिलती मां इधर उधर भागती रही अपनी मासूम बेटी को सीने से चिपकाए डॉक्टरों के चक्कर लगाती रही मगर मां को यह पता ही नहीं चला कि उसकी बेटी की सांसे कब थम गई इसे लाचार सरकारी सुविधा या बेपरवाह नौकरशाह कहें या जिले की ध्वस्त चिकित्सा व्यवस्था बताते चलें कि जनपद फर्रुखाबाद के ग्राम अछनेरा निवासी टिल्लू शहर के आगरा रोड स्थित संस्कार गार्डन में मजदूरी करने का काम करते हैं अपनी पत्नी प्रीति और चार बच्चों के साथ रहते हैं दो वर्ष की बेटी राखी को कई दिनों से बुखार आ रहा था शनिवार को तबीयत खराब होने पर प्रीति और टिल्लू अपनी बीमार बेटी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे टिल्लू कभी डॉक्टर के बारे में पता करता तो कभी लंबी लगी लाइन में पर्चा बनवाने के लिए खड़ा हो जाता पत्नी बुखार से तप रही अपनी मासूम बेटी को छाती से लगाए कभी इधर दौड़ कर जाती तो कभी उधर दौड़ कर जाती तीन घंटे बुखार से तप रही बेटी को सीने से लगाकर अभागिन मां इधर-उधर दौड़ती रही मगर उसकी किसी ने एक नहीं सुनी तीन घंटे बीत जाने के बाद जब गोद में कोई हलचल नहीं हुई तो मां समझ गई और उसने देखा उसकी बेटी अब संसार को छोड़कर कहीं चली गई है गोद में बेजान बेटी को देखकर मां सिसक सिसक कर रोने लगी इसे क्या कहा जाए गरीब आदमी की जिला अस्पताल में कोई सुनने वाला नहीं है इलाज के बदले गरीब को ज्यादातर दुत्कार दिया जाता है कहां गया बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं का अभियान देश व प्रदेश की सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करनें के साथ बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं का नारा देकर एक अभियान चला रही है लेकिन जिस प्रकार से जिला अस्ताल में घटना हुई यह घटना बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं अभियान के लिए बहुत बड़ा झटका है इस प्रकार की घटनाओं से सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगा दियें है क्या कहतें है जिला अस्पताल के सीएमएस मैं जिला अस्पताल में ही मौजूद था मेरे पास कोई भी पीड़ित नहीं पहुंचा यह 100 सैया अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही है जब ओपीडी पर्चा काटा था तो उपचार भी लिखना था मेरे संज्ञान में काफी समय बीत जाने के बाद मामला आया था की बच्ची की मौत हुई है और सब वाहन चाहिए सब बहन के लिए मेरे द्वारा फर्रुखाबाद जाने की अनुमति दी गई है डॉक्टर आरके सागर सीएमएस जिला अस्पताल मैनपुरी ।

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