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भारत में महिलाओं के साथ दरिंदगी कब खत्म होगी : ज्योति बाबा


🗒 सोमवार, सितंबर 13 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
भारत में महिलाओं के साथ दरिंदगी कब खत्म होगी : ज्योति बाबा

रविकान्त तोमर
कानपुर। आज से 8 साल पहले निर्भया गैंगरेप के वक्त आधी आबादी को महफूज रखने की कसमें खाई गई थीं। संकल्प लिया गया था कि अब देश को बलात्कार व महिला हिंसा मुक्त बनाएंगे। लेकिन एनसीआरबी की मानें तो प्रतिदिन औसतन 88 रेप होते हैं। इन्हीं घटनाओं के जनाक्रोश को कम करने के लिए सरकार ने 2013 में क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट ऑर्डिनेंस लाए। जिसमें रेप करने वाले को फांसी की सजा का प्रावधान किया गया। बावजूद इसके दरिंदगी थमने का नाम ही नहीं ले रही है। उपरोक्त बात सोसायटी योग ज्योति इंडिया के तत्वाधान में राष्ट्रीय युवा हिंदू वाहिनी प्रदेश अध्यक्ष नीतू शर्मा के सहयोग से नशा हटाओ बेटी बचाओ पेड़ लगाओ कोरोना मिटाओ अभियान के तहत कोरोना गाइडलाइंस के अंतर्गत यशोदा नगर कार्यालय में मुंबई बलात्कार कांड के विरोध में आयोजित महिला चौपाल में अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्त अभियान के प्रमुख योग गुरु ज्योति बाबा ने कही,ज्योति बाबा ने आगे कहा कि बलात्कार की बढ़ती घटनाओं के चलते ही 2015 में जुवेनाइल जस्टिस बिल पास हुआ इसमें 18 से कम उम्र के किशोरों को जघन्य अपराध में कोई छूट ना देने का प्रावधान किया गया क्योंकि कम उम्र के किशोर भी जघन्य अपराधों में ज्यादा लिप्त पाए जा रहे हैं सभी महिलाओं व पदाधिकारियों ने एक स्वर में मुंबई की निर्भया के साथ हुई दरिंदगी की कटु निंदा की और ऐसे जघन्य अपराधों को अंजाम देने वाले आरोपी को फांसी की सजा फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलवा कर दी जाए,जिस प्रकार की दरिंदगी नशे की हालत में आरोपी ने की है उसे ऐसी सजा दी जाए जिससे पूरे देश में कठोर कानून के राज का संदेश जाए,प्रदेश अध्यक्ष नीतू शर्मा ने कहा कि हम सभी बहने मुंबई की निर्भया को त्वरित न्याय दिलाने के लिए कानपुर के जिलाधिकारी के द्वारा भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर ऐसे दरिंदों को कठोरतम सजा दिलाने की मांग करेंगी,मुंबई की महिला के साथ हुई दरिंदगी से देश की महिलाओं में ना सिर्फ आक्रोश है बल्कि वह सरकार से आधी आबादी को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने का भी अनुरोध करती है,हिंदू वाहिनी कानपुर की हर महिला को मिशन शक्ति से जोड़कर सशक्त बनाने का काम और तेज करेगी,राष्ट्रीय संरक्षक डॉ आर पी भसीन ने कहा कि डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद हम मुंबई की निर्भया को बचा न सके,21वीं सदी में भी देश में कबीलाई संस्कृत वाली विचारधारा के वशीभूत होकर ऐसा जघन्य अपराध करने वालों को हर कीमत पर कठोर से कठोरतम दंड मिले,मानवाधिकार वादी वूमेन एक्टिविस्ट गीता पाल ने कहा कि यह मामला बहुत दुर्भाग्यपूर्ण व मन को दुखी करने वाला तथा जघन्य,शर्मनाक एवं हृदय विदारक है हम ऐसे मामलों के सभी दोषियों को अति शीघ्र दंडित देखना चाहते हैं,महिला चौपाल का संचालन संगीता तिवारी व धन्यवाद मंजू मिश्रा ने दिया,अन्य प्रमुख स्नेहा पांडे, अनीता पांडे,प्रिया वर्मा,दीपक सोनकर,हरदीप सिंह सहगल,जस्सी शुक्ला,रोहित कुमार इत्यादि थे।