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केंद्र ने कहा- बांग्लादेशी घुसपैठियों की तुरंत पहचान करें राज्य


🗒 मंगलवार, जुलाई 26 2022
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
केंद्र ने कहा- बांग्लादेशी घुसपैठियों की तुरंत पहचान करें राज्य

नई दिल्ली, । बांग्लादेश से अवैध तरीके से आने वाले घुसपैठियों की समस्या दिन पर दिन गंभीर होती जा रही है। इसको ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से बांग्लादेशी घुसपैठियों की तुरंत पहचान करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को कहा है। यह जानकारी समाचार एजेंसी पीटीआई ने दी है।लोकसभा में मंगलवार को एक लिखित जवाब में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि पिछले पांच साल में 2,399 बांग्लादेशी पकड़े गए हैं। इन सभी के पास अवैध तरीके हासिल किए गए भारतीय दस्तावेज मिले थे।राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से विशेष क्षेत्रों में अवैध प्रवास को भी रोकने को कहा गया है। घुसपैठियों के बायोमैट्रिक विवरण के साथ ही पूरी जानकारी एकत्र करने की सलाह दी गई है। उनके पास पाए जाने वाले भारतीय दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड इत्यादि को रद करने, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और उन्हें वापस उनके देश भेजने की प्रक्रिया शुरू करने को भी कहा गया है।नित्यानंद राय ने सदन को बताया कि प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत काम करने वाले किसी भी कश्मीरी पंडित ने हाल में घाटी में कश्मीरी पंडितों की हत्या के विरोध में इस्तीफा नहीं दिया है। कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए गए हैं।गृह राज्यमंत्री ने सदन को बताया कि 2017 के बाद से जम्मू-कश्मीर में 28 प्रवासी मजदूर मारे गए, इनमें सात मजदूर बिहार के थे। केंद्र शासित प्रदेश में आतंकी हमलों में कमी आई है। 2018 के 417 आतंकी हमले हुए थे, जिनकी संख्या 2021 में 229 रह गई। हालांकि, अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के खिलाफ लक्षित हमले बढ़े हैं।नित्यानंद राय ने बताया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती सीमा पर क्षेत्राधिकार बढ़ने से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को ड्रग्स और नशीले पदार्थो की तस्करी को नियंत्रित करने में सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र विरोधी ताकतों द्वारा ड्रोन और मानव रहित विमानों के इस्तेमाल को देखते हुए बीएसएफ के क्षेत्राधिकार को बढ़ाने के फैसले से लाभ मिला है। बीएसएफ को अब सीमा से 50 किलोमीटर अंतर तक जांच पड़ताल करने की छूट मिली है।सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने सदन को बताया कि 2019 के बाद से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई करते हुए 188 लोगों की मौत हुई है। इनमें 2019 में 116, 2020 में 19, 2021 में 36 और 2022 में 17 मौतें शामिल हैं। सीवर या सेप्टिक टैंक की हाथ से सफाई करने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए विशेष योजना के तहत 2013-14 के बाद से 266.16 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

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