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राजनीति में लोगों में सच बोलने का साहस होना चाहिए - PM मोदी


🗒 शनिवार, जुलाई 30 2022
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
राजनीति में लोगों में सच बोलने का साहस होना चाहिए -  PM मोदी

नई दिल्ली, । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि राजनीति में लोगों में सच बोलने की हिम्मत होनी चाहिए लेकिन कुछ राज्य इससे बचने की कोशिश करते हैं। प्रधानमंत्री ने वस्तुतः यहां पुर्नोत्थान वितरण क्षेत्र योजना (Revamped Distribution Sector Scheme) का शुभारंभ करने के बाद यह टिप्पणी की। उन्होंने एनटीपीसी की विभिन्न हरित ऊर्जा परियोजनाओं को समर्पित और आधारशिला भी रखी, और राष्ट्रीय सौर रूफटॉप पोर्टल का शुभारंभ किया। पीएम मोदी ने कहा कि समय बीतने के साथ, 'हमारी राजनीति में एक गंभीर विकार आ गया है।'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- 'राजनीति में लोगों में सच बोलने का साहस होना चाहिए, लेकिन हम देखते हैं कि कुछ राज्य इससे बचने की कोशिश करते हैं। यह रणनीति अल्पावधि में अच्छी राजनीति की तरह लग सकती है। लेकिन यह आज की सच्चाई, आज की चुनौतियों, कल के लिए स्थगित करने जैसा है। लेकिन यह कल के लिए, हमारे बच्चों के लिए और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए आज की चुनौतियों को स्थगित करने की रणनीति है। कई राज्यों में आज की समस्याओं का समाधान टालने और उन्हें कल के लिए छोड़ देने के इस रवैये से बिजली क्षेत्र में भारी समस्याएं पैदा हो गई हैं।'प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे वितरण क्षेत्र में नुकसान दोहरे अंकों में है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में वितरण और ट्रांसमिशन घाटे को कम करने में निवेश की कमी है। प्रधान मंत्री ने टिप्पणी की कि लोगों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि विभिन्न राज्यों में बकाया राशि 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की।पीएम ने कहा, 'उन्हें यह पैसा बिजली उत्पादन कंपनियों को देना है। बिजली वितरण कंपनियों पर कई सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों का 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक बकाया है।' विभिन्न राज्यों में बिजली सब्सिडी के लिए समय पर और पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और यह बकाया भी 75,000 करोड़ रुपये से अधिक है। प्रधानमंत्री ने जिन राज्यों का बकाया है, उन्हें जल्द से जल्द चुकाने का अनुरोध किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने तक 175 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता बनाने का संकल्प लिया है। आज हम इस लक्ष्य के करीब आ गए हैं। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 170 गीगावाट क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से स्थापित की जा चुकी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बिजली का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ सरकार का जोर बिजली की बचत पर भी है।

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