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नहीं रहे गोवा के सीएम मनोहर पर्रीकर, लंबी बीमारी के बाद हुआ निधन


🗒 रविवार, मार्च 17 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर का एक साल से गंभीर बीमारी से जूझने के बाद रविवार शाम को निधन हो गया। केंद्र सरकार ने मनोहर पर्रीकर के निधन पर 18 मार्च सोमवार को राष्ट्रीय शोक की घोषणा की। राष्ट्रीय राजधानी और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानी में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे।इससे पूर्व उनके कार्यालय ने उनकी हालत गंभीर होने की जानकारी दी थी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पर्रीकर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। 63 वर्षीय पर्रीकर गंभीर पैंक्रिएटिक बीमारी से जूझ रहे थे। उन्होंने डोना पौला स्थित निजी निवास में अंतिम सांस ली। मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर बताया कि डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का भरसक प्रयास किया।

नहीं रहे गोवा के सीएम मनोहर पर्रीकर, लंबी बीमारी के बाद हुआ निधन

उल्लेखनीय है कि पर्रीकर पिछले एक साल से बीमार चल रहे थे। पिछले दो दिनों में उनकी सेहत और बिगड़ती चली गई। सेहत बिगड़ने की सूचना मिलने के बाद उनके आवास पर उनके रिश्तेदारों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं का आने का सिलसिला शुरू हो गया। राज्य के पुलिस महानिदेशक प्रणब नंदा भी पहुंचे।सादगी, ईमानदारी और मुस्कुराहट भरी भाव भंगिमा मनोहर पर्रीकर की पहचान थी। पर्रीकर के निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह, गायिका लता मंगेशकर, पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, सुषमा स्‍वराज, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, थावर चंद गहलोत, मुख्‍तार अब्‍बास अंसारी, मनोज सिन्‍हा, दिल्‍ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज चौहान, सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव, शरद यादव, ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने भी ट्वीट कर श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पर्रीकर को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि गोवा और देश के लिए उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। 

पीएम नरेंद्र मोदी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मनोहर पर्रीकर जैसा नेता कोई नहीं है। एक सच्चे देशभक्त और असाधारण प्रशासक, वह सभी की प्रशंसा करते थे। राष्ट्र के प्रति उनकी त्रुटिहीन सेवा को पीढ़ियों द्वारा याद किया जाएगा। उनके निधन से गहरा दुख हुआ। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना। पर्रीकर आधुनिक गोवा के निर्माता थे। अपने मिलनसार व्यक्तित्व और सुलभ स्वभाव की बदौलत वे वर्षों तक राज्य के पसंदीदा नेता बने रहे। उनकी जन-समर्थक नीतियों ने गोवा को प्रगति की उल्लेखनीय ऊंचाइयों को सुनिश्चित किया।भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह ने कहा कि पूरी भाजपा पर्रीकर जी के परिवार के साथ है। मैं लाखों भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ और महत्वपूर्ण रूप से गोवा के लोगों के साथ जो उनके परिवार थे, अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। भगवान इस दुखद नुकसान का सामना करने के लिए शोक संतप्त परिवार को शक्ति दे। शांति शांति शांति। सुषमा स्‍वराज ने क हा कि मनोहर पर्रीकर के देहांत का समाचार सुनकर बहुत दुःख हुआ। हालांकि वो बहुत समय से बीमार थे तो भी मन इसके लिए तैयार नहीं था कि वह हमें इतनी जल्दी छोड़ जायेंगे। मेरे लिए तो वो भाई की तरह थे इसलिए उनका निधन मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर लिखा कि गोवा के सीएम के निधन से बेहद दुखी हूं। वह बीते एक साल से बीमारी से पूरी जीवटता के साथ संघर्ष कर रहे थे। पार्टी लाइन से ऊपर वह सम्मानित नेता थे और गोवा के सबसे अच्छे लोगों में से थे। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। 

एक साल से पैनक्रियाटिक कैंसर से जूझ रहे 63 वर्षीय मनोहर पर्रीकर सबसे पहले 14 फरवरी, 2018 को बीमार पड़े थे। इसके बाद उन्हें गोवा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। अगले दिन उन्हें मुंबई के लीलावती अस्पताल ले जाया गया। कुछ दिनों तक उनका अमेरिका में इलाज चला।पिछले साल 15 सितंबर को उन्हें नई दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद पर्रीकर 14 अक्टूबर को गोवा लौट आए थे। उन्होंने 29 जनवरी को गोवा के बजट सत्र में भाग लेने के साथ ही अगले दिन राज्य का बजट भी पेश किया। हाल में गोवा का बजट पेश करने से पहले मनोहर पर्रीकर ने कहा था कि परिस्थितियां ऐसी हैं कि विस्तृत बजट पेश नहीं कर सकता लेकिन मैं बहुत ज्यादा जोश और पूरी तरह होश में हूं। सत्र के अंतिम दिन 31 जनवरी को उन्हें दिल्ली के एम्स में ले जाया गया था। वह पांच फरवरी को गोवा लौट आए। 

13 दिसंबर 1955 को जन्मे पर्रीकर ने 1978 में आइआइटी बॉम्बे से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। वह किसी आईआईटी से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने के बाद देश के किसी राज्य के मुख्यमंत्री बनने वाले पहले शख्स थे। पर्रीकर पहली बार 1994 में पणजी विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए थे। इसके बाद वह लगातार चार बार इस सीट से जीतते रहे।राजनीति में उतरने से पहले पर्रीकर का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से भी जुड़ाव था। वह आरएसएस की उत्‍तर गोवा यूनिट में सक्रिय थे। वर्ष 2000 में वह पहली बार गोवा के मुख्यमंत्री बने। उनकी छवि आम आदमी के सीएम के रूप में थी। अकसर स्कूटी से सीएम दफ्तर जाते उनकी तस्वीरें मीडिया में काफी चर्चित रहीं। हालांकि, उनकी पहली सरकार फरवरी 2002 तक ही चल सकी।

 

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