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कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत पर मतदान की तत्काल मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल


🗒 सोमवार, जुलाई 22 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

एक तरफ जहां कर्नाटक में तीन दिनों से चल रही खींचतान के बाद आखिर विश्वास प्रस्ताव पर वोट कब होगा। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक विधानसभा में तत्काल वोट करवाने पर मंगलवार को विचार करने का फैसला किया है।सोमवार को ऐसी याचिका पर तत्काल सुनवाई से इन्कार कर दिया। केपीजेपी के आर शंकर और निर्दलीय विधायक एच नागेश ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कुमारस्वामी सरकार पर बहुमत परीक्षण को टालने का आरोप लगाया है।सोमवार को याचिकाकर्ताओं का कहना था कि मुख्यमंत्री कुमार स्वामी की सरकार सदन में बहुमत खो चुकी है और वह लगातार विश्वास मत पर मतदान को टालने में लगी हुई है इसलिए सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक में सोमवार को ही विश्वासमत पर मतदान कराने का आदेश दे।सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि सोमवार को मामले पर सुनवाई करना संभव नहीं है। इस पर रोहतगी ने मंगलवार को सुनवाई का अनुरोध किया जिस पर पीठ ने विचार करने का आश्वासन दिया था। देर शाम जारी सुप्रीम कोर्ट की सूची में विधायकों की याचिका मंगलवार को सुनवाई के लिए लगी हैं।यह भी कहा गया है कि राज्यपाल ने अनुच्छेद 175 के तहत विश्वास मत साबित करने का संदेश भेजा था, लेकिन फिर भी मतदान नहीं कराया जा रहा और उसे लटकाए हुए हैं। विधायकों ने यह भी आशंका जताई है कि कुमारस्वामी विश्वास मत पर मतदान को टालने के लिए खराब सेहत की इमरजेंसी के आधार पर अस्पताल में भी भर्ती हो सकते हैं।इन दो विधायकों के अलावा कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव और मुख्यमंत्री व जेडीएस प्रमुख कुमार स्वामी ने अलग से याचिका दाखिल कर कोर्ट से गत 17 जुलाई का आदेश स्पष्ट करने की मांग की है। इन याचिकाओं में कहा गया है कि बागी विधायकों को सदन की कार्यवाही में भाग लेने से छूट देने वाला कोर्ट का आदेश पार्टी व्हिप जारी करने के संवैधानिक अधिकार के आड़े आता है।सोमवार को वकील लिली थामस ने जब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अखबार की खबर का जिक्र करते हुए कर्नाटक में विधायकों की खरीद फरोख्त की बात कही और कोर्ट से मामले में दखल देने को कहा तो मुख्य न्यायाधीश ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि मैडम आप न तो अखबार पढ़ें न ही टीवी देखें खुश रहेंगी। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने गंभीर होते हुए कहा कि आप एक वकील हैं आपको जो भी कहना है अर्जी दाखिल कर कहें।

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