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अंग्रेजों से भी ज्यादा जुल्म हुए थे इन्दिरा गांधी की सरकार में


🗒 सोमवार, सितंबर 30 2019
🖋 रजत तिवारी, बुंदेलखंड सह संपादक बुंदेलखंड

इमरजेंसी के समय संघ के जिला प्रचारक समेत कई लोगों के घरों में हुई थी तोड़फोड़ 

अंग्रेजों से भी ज्यादा जुल्म हुए थे इन्दिरा गांधी की सरकार में

-इन्दिरा गांधी के खिलाफ खबर छापने और अखबार बांटने में रात भर दी गई यातनायें 

हमीरपुर, - उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में इमरजेंसी के दौरान इन्दिरा गांधी के खिलाफ स्थानीय अखबार में छापकर बगावत करने के आरोप में आरएसएस के कई पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों में भेजा गया था। पुलिस ने थाने में आग लगाने और रेलवे की पटरियां उखाड़ने के प्रयासों का मामला भी दर्ज करके इमरजेंसी का विरोध करने वालों पर भारी अत्याचार किया था। उनके घरों में भी तोड़फोड़ की गयी थी। 21 माह तक पूरे क्षेत्र में उत्पीड़नात्मक कार्यवाही का दौर चलता रहा। 

 

चोरी छिपे अखबार निकालने पर हुई गिरफ्तारी 

सत्ता विरोधी आक्रोश को कुचलने के लिये तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने 25 जून 1975 की आधी रात को पूरे देश में इमरजेंसी लागू कर दी थी। अगले ही दिन देश में गैर कांग्रेसी दलों के छोटे बड़े नेताओं की धरपकड़ शुरू हो गई। हमीरपुर जिले के मौदहा कस्बे में भी बौद्धिक संघ प्रमुख देवी प्रसाद गुप्ता के खिलाफ कार्यवाही के लिये खुफिया तंत्र को लगाया गया। तीन जुलाई 1975 को आरएसएस पर प्रतिबंध लगने के बाद देवी प्रसाद गुप्ता व जिला प्रचारक ओमप्रकाश तिवारी ने इन्दिरा गांधी के खिलाफ चोरी छिपे एक अखबार छापना शुरू किया।अखबार में सरकार की उत्पीड़नात्मक कार्यवाही का एक कालम भी होता था। इसका वितरण कराया तो खुफिया तंत्र ने पुलिस के साथ इनके घरों में छापेमारी शुरू कर दी। पूरी रात प्रिंटिंग प्रेस मशीन के बारे में पूछताछ कर इमरजेंसी का विरोध करने वालों को भयभीत किया गया। फिर भी इन्दिरा गांधी के खिलाफ नारेबाजी करने और भारत माता की जय करने पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था। इन सभी के खिलाफ रेल की पटरियां उखाड़ने और थाने में आग लगाने के प्रयासों का आरोप लगाया गया था। इमरजेंसी के दौरान सात माह तक जेल में रहने वाले वयोवृद्ध देवी प्रसाद गुप्ता मौदहा कस्बे में आज भी लेखन कार्य कर रहे हैं। वे आरएसएस के बौद्धिक संघ प्रमुख रहे हैं।  

 

जेल के अंदर भी इंदिरा के खिलाफ लगे थे नारे

लोकतंत्र सेनानी देवी प्रसाद गुप्ता ने बताया कि अक्टूबर 1975 में उन्हें गिरफ्तार करके कुरारा थाना फूंकने का प्रयास करने और रेल की पटरियां उखाड़ने के आरोप लगाते हुये मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने छेनी हथौड़ा की बरामदगी भी दिखाई थी। उन्होंने बताया कि मदन राजपूत, बृजराज समेत कई छात्रों को भी इमरजेंसी में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने बताया कि उस जमाने में इन्दिरा गांधी के खिलाफ नारेबाजी करने पर हमीरपुर और महोबा के 145 विरोधियों को जेल में रखा गया था। जेल में पूरी रात सभी लोग इन्दिरा गांधी के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे और भारत माता की जय के नारे लगाते थे। कई बुजुर्ग लोग भी उनके इस आंदोलन में साथ थे। 

 

ढाई माह के पैरोल में भी की गयी थी छापेमारी

सत्तर साल की उम्र में लेखन कार्य से जुड़े लोकतंत्र सेनानी देवी प्रसाद गुप्ता ने बताया कि शुरू में उन्हें तीन माह जेल में रहना पड़ा लेकिन पिता और बच्चों की तबियत खराब होने पर ढाई माह तक पैरोल में बाहर रहे थे। उन्होंने बताया कि ढाई माह के पैरोल अवधि में भी उनके घर और रिश्तेदारी में छापेमारी महज प्रिंटिंग प्रेस मशीन की बरामदगी के लिये होती रही। हर रोज धमकी और भय से गुजरता था। घर में पुलिस वालों ने सारा सामान भी तोड़फोड़ कर बर्बाद कर दिया था। उन्होंने बताया कि इस देश में अंग्रेजों ने भी इतना जुल्म नहीं किया होगा जितना कि इन्दिरा गांधी की सरकार में हुआ था। लोगों के मौलिक अधिकार खत्म थे। लोकतंत्र भी रौंदा गया था। 

 

कांग्रेस के खिलाफ संसदीय क्षेत्र में भड़का था आक्रोश

लोकतंत्र सेनानी देवी प्रसाद गुप्ता ने बताया कि देश में 21 माह तक इमरजेंसी लागू रही। इस दौरान कांग्रेसी विधायकों के इशारे पर जनसंघ समेत अन्य दलों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्यवाही की गईं, इसीलिये इमरजेंसी के बाद हुये आम चुनाव में आम जनता ने कांग्रेस के खिलाफ वोट किया था। जेल से बाहर आने के बाद सभी राजनैतिक बंदियों ने पूरे संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस विरोधी अभियान चलाया गया था जिसके कारण 1977 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार एवं सांसद स्वामी ब्रम्हानंद महाराज को पराजित होना पड़ा था और यहां बीकेडी के तेज प्रताप सिंह सांसद बने थे। उन्हें सर्वाधिक 54 फीसद मत मिले थे। 

 

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