अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐसा मील का पत्थर है जो देश की दिशा तय करेगा

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अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐसा मील का पत्थर है जो देश की दिशा तय करेगा


🗒 शनिवार, नवंबर 09 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

अयोध्या पर बहुप्रतीक्षित फैसला आ गया है। संतुलित और सबकी भावनाओं को समाहित करने वाला फैसला जिसने हर किसी के साथ न्याय किया और देश की भावना को पूरा किया। सही मायने में यह फैसला ऐसा मील का पत्थर है जो देश की दिशा तय करेगा।एक ऐसा फैसला जिसमें केवल देश जीता है, किसी संप्रदाय की जीत हार नहीं है। घर के अंदर और पड़ोस में छिपे दुश्मनों को यह साबित कर दिखाया है कि वह दूसरों के बहकावे में आने वाले नहीं हैं। यह फैसला लोगों के दिलों में उतर गया है। ऐतिहासिक अयोध्या फैसले की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि यह 5-0 से आया है।बहुत छोटे फैसले भी मतभिन्नता के शिकार होते हैं और यह तो देश का सबसे पुराना और चर्चित केस था। यह उदाहरण है कि लोग अब विवादों से आगे बढ़ना चाहते हैं। सही मायने में देखें तो इस फैसले का देश के सभी दलों और समुदायों ने जिस तरह एकजुट होकर स्वागत किया है, वह एक नये युग की शुरूआत जैसी लगती है।वरना इस तरह के फैसले के बाद पहले आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो जाता था और देश में माहौल खराब होने लगता था। अपने-अपने लाभ-हानि के हिसाब से राजनीतिक दल खेमों में बंट जाते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। यहां तक कि असद्दुदीन ओवैेसी की अनर्गल बयानबाजी को मुस्लिम नेताओं ने ही खारिज कर दिया।इतने पुराने विवाद की इस तरह शांति से हल होते देखना सचमुच में न्यू इंडिया की झलक देता है। खुद प्रधानमंत्री ने नई सोच की बात की तो संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आंदोलन संघ का काम नहीं है। अयोध्या आंदोलन में तो संघ अपवाद के रूप में जुड़ गया था। इसके गहरे संकेत हैं। यह साफ करता है कि देश किसी भी अन्य विवाद में उलझना नही चाहता है।मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में जिस तरह भारत के लिए नासूर बन गए समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा रहा है, वह देखने लायक है। इनमें वो समस्याएं शामिल है, जिनके बारे में लोग मान बैठे थे कि इनका हल संभव नहीं है। अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद राममंदिर विवाद उनमें शामिल हैं। अब यूं तो आरोप यह लगता रहा था कि भाजपा इसका राजनीतिकरण कर रही है। लेकिन क्या कोई इसे झुठला सकता है कि भाजपा पर यह आरोप लगाकर विपक्षी दल राजनीति किया करते थे।अब जन दबाव में ही सही कांग्रेस ही नहीं वाममोर्चे जैसे दलों ने भी फैसले का स्वागत किया है और राम मंदिर निर्माण की बात कही है जो सकारात्मक है।शनिवार को पाकिस्तान स्थित करतारपुर का रास्ता खुल गया। सिख भाईयों की वर्षो की आस पूरी हुई। राम मंदिर निर्माण का शांतिपूर्ण रास्ता निकल गया और यह भी साफ हो गया कि अयोध्या में पांच एकड़ भूमि में शायद भारत की सबसे बड़ी मस्जिद बनेगी। पूरे देश को इकट्ठे होकर इन तीनों का जश्न मनाना चाहिए।वहीं आजादी के बाद से चली आ रही नागा समस्या भी समाप्त होने के कगार पर है और अलग संविधान और अलग झंडे की मांग के बगैर नागा अलगाववादी समझौते के लिए राजी हो गए हैं। उत्तर पूर्व में शांति बहाली की यह बड़ी पहल है।सभी जानते हैं कि यदि 130 करोड़ लोग आपसी रंजिश और मतभेदों को भूल एकजुट होकर राष्ट्रनिर्माण में जुटे तो भारत को विश्व गुरू बनने से कोई रोक नहीं सकता है। इस बार हमने यह कर दिखाया है। आगे भी यही जज्बा बरकरार रखना होगा। इस पूरे प्रकरण में जहां शांति व्यवस्था की पूरी मुस्तैदी के लिए केंद्र और राज्यों के प्रशासन की पीठ थपथपाई जानी चाहिए वहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह साबित कर दिखाया है कि वह केवल न्याय के साथ है।

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐसा मील का पत्थर है जो देश की दिशा तय करेगा

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