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मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का निधन, पांच दिन का राजकीय शोक


🗒 मंगलवार, जुलाई 21 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का निधन, पांच दिन का राजकीय शोक

मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का मंगलवार सुबह निधन हो गया है। वे काफी दिनों से अस्वस्थ थे और लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में इलाज करा रहे थे। राज्यपाल के निधन पर प्रदेश में पांच दिन (21 से 25 जुलाई) का राजकीय शोक घोषित किया गया है।मंगलवार को सभी सरकारी कार्यालय बंद रखे गए। कैबिनेट की बैठक दो मिनट का मौन रखकर स्थगित कर दी गई। सामान्य प्रशासन विभाग ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि राजकीय शोक के दौरान पांच दिन तक मनोरंजन के कार्यक्रम न किए जाएं। राष्ट्रध्वज भी आधा झुका रहेगा।मुख्यमंत्री ने राज्यपाल टंडन को श्रद्धाजंलि देते हुए कहा कि उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। वे सार्वजनिक जीवन में शुचिता के प्रतीक थे। मध्य प्रदेश में राज्यपाल के रूप में उन्होंने हमेशा जनहित में मार्गदर्शन और प्रेरणा दी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश में उनके सुझाए नवाचार को हम सबने देखा है। उन्होंने राजभवन में न सिर्फ गोशाला का संचालन करवाया, बल्कि वे कहते थे कि मैं इस प्रयोग को सफल करके बताऊंगा। राजनीति में आपसी सौहा‌र्द्र और संबंधों को हमेशा उन्होंने वरीयता दी।उनकी सोच यही थी कि राजनीति सेवा का माध्यम है। दल कोई भी हो, सभी को मिल-जुलकर राष्ट्र की सेवा करना चाहिए। वर्ष 1978 में जब वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद पहुंचे थे, तो वहां भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। विधानसभा के लिए तीन बार चुने गए। नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में वहां उन्होंने बताया कि विरोध के स्वर कैसे होने चाहिए। मंत्री के रूप में पांच रुपये, दस रुपये और पंद्रह रुपये प्रतिदिन पर निचले तबके को मकान का मालिकाना हक दिलाने की स्वप्निल योजना साकार की थी। उत्तर प्रदेश में पहली बार गोवध निषेध अधिनियम बना। हरिद्वार में पांच किलोमीटर लंबा घाट जनसहयोग से बनवाना उनकी दूरदर्शी सोच का ही परिणाम था। अयोध्या मामलों के प्रभारी के रूप में श्रीराम जन्मभूमि न्यास को 42 एकड़ जमीन सौंपने का काम तत्परता और संकल्पबद्घता से किया।वे सर्वप्रिय थे और यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी थी। वर्ष 2009 में लखनऊ से सांसद बने और अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को विस्तार दिया। मध्य प्रदेश में 29 जुलाई 2019 को उन्होंने कार्यभार संभाला था। उनके कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण होने ही वाला था। मध्य प्रदेश में उनके इस कार्यकाल को सदैव याद रखा जाएगा।

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