UNHRC की बैठक में भारत का पलटवार, आतंकवाद की नर्सरी पाकिस्‍तान मानवाधिकार की वकालत न करे

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UNHRC की बैठक में भारत का पलटवार, आतंकवाद की नर्सरी पाकिस्‍तान मानवाधिकार की वकालत न करे


🗒 शनिवार, सितंबर 26 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
UNHRC की बैठक में भारत का पलटवार, आतंकवाद की नर्सरी पाकिस्‍तान मानवाधिकार की वकालत न करे

भारत ने मानवाधिकार परिषद के 45वें सत्र में शुक्रवार को पाकिस्‍तान पर करारा हमला बोला। भारत ने कहा कि पाकिस्तान में जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति बेहद खराब है। जेनेवा में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव सेंथिल कुमार  ने कहा कि दूसरों को उपदेश देने से पहले पाकिस्तान को यह याद रखना चाहिए कि आतंकवाद मानवता के खिलाफ अपराध का सबसे खराब रूप है। उन्‍होंने पाकिस्‍तान को लताड़ लगाते हुए कहा कि दुनिया को ऐसे देश के मानवाधिकार पर सीख की जरूरत नहीं है जिसे आतंकवाद की नर्सरी रूप में जाना जाता है।  दरअसल, जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को उठाया था। इस पर पलटवार करते हुए भारत ने पाकिस्‍तान को आतंकवाद की नर्सरी बताया। यही नहीं गुलाम कश्मीर और गिलगिट-बाल्टिस्तान के प्रतिनिधियों ने भी मानवाधिकार के मसले पर पाकिस्तान को बेनकाब कर दिया। पाकिस्तान की ऐसी शर्मनाक स्थिति के बारे में तो शायद वहां के कूटनीतिकारों ने भी कल्पना नहीं की होगी। यूएनएचआरसी में शुक्रवार को भारत के प्रतिनिधि पवन बढे ने खुलासा किया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद पाकिस्तान में आतंकी संगठन खुलेआम चंदा एकत्र कर रहे हैं।इससे पहले, गुरुवार को भी भारतीय प्रतिनिधि ने कश्मीर मुद्दा उठाने पर पाकिस्तान को फटकार लगाई थी। यूएनएचआरसी में भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारी विमर्श आर्यन ने कहा था, 'पाकिस्तान ने भारत के आंतरिक मामले को उठा कर इस मंच के नियमों का उल्लंघन किया है। पाकिस्तान स्वयं ही अपने नागरिकों के मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन कर रहा है। इस महामारी में जहां पूरी दुनिया में लोग मास्क लगा कर अपनी जान बचाने में लगे हैं, वहीं पाकिस्तान अपना आतंकी चेहरा छिपाने के लिए मास्क का इस्तेमाल कर रहा है। यह सही समय है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात पर ध्यान दे कि पाकिस्तान जैसा असफल देश भारत को लोकतंत्र व मानवाधिकार पर ज्ञान दे रहा है।'वहीं, गुलाम कश्मीर के नागरिक मुहम्मद सज्जाद राजा ने कहा कि पाकिस्तान उनके क्षेत्र के नागरिकों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार कर रहा है। आजाद कश्मीर चुनाव कानून, 2020 ने हमारे सभी लोकतांत्रिक अधिकारों का खात्मा कर दिया है। पाकिस्तान में विलय करने के फैसले के विरोध को गैर कानूनी करार दिया गया है। यह अपने आप में ही संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उल्लंघन है। गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र के निर्वासित नेता अमजद अयूब मिर्जा ने कहा कि उनके गृह क्षेत्र पर पाकिस्तान के साथ ही चीन के कब्जे का भी खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि गिलगिट-बाल्टिस्तान में काम करने वाला हर सरकारी अधिकारी पाकिस्तानी है और वहां हमारे प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जा रहा है।

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