पाक के लिए बड़ा झटका है ब्रिक्स देशों की आतंकवाद के खिलाफ गोलबंदी, चीन निभाएगा यारी या कसेगा नकेल

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पाक के लिए बड़ा झटका है ब्रिक्स देशों की आतंकवाद के खिलाफ गोलबंदी, चीन निभाएगा यारी या कसेगा नकेल


🗒 बुधवार, नवंबर 18 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
पाक के लिए बड़ा झटका है ब्रिक्स देशों की आतंकवाद के खिलाफ गोलबंदी, चीन निभाएगा यारी या कसेगा नकेल

मंगलवार को हुई ब्रिक्स देशों की वर्चुअल शिखर बैठक में आतंकवाद के खिलाफ एक समग्र रणनीति बनाने पर सहमति बनी है। यह रणनीति आने वाले दिनों में आतंकवाद के समर्थन के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरने में एक बड़ा हथियार साबित हो सकती है। इसमें ब्रिक्स के पांचों सदस्य देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के बीच आतंकवाद के मसले पर एक दूसरे का समर्थन करने का वादा किया गया है।यही नहीं संयुक्त राष्ट्र की अगुवाई में इस लड़ाई में आपसी सहयोग करने और एक दूसरे की संप्रभुता का आदर करने के साथ ही एक दूसरे के आतंरिक मामले में दखल नहीं देने की बात कही गई है। ऐसे में सवाल यही है कि ब्रिक्स के मंच से आतंकवाद के खिलाफ चीन क्या अपने मित्र राष्ट्र पाकिस्तान का पक्ष लेगा या उसकी आतंकियों को शह देने वाली हरकतों पर नकेल कसेगा?ब्रिक्स देशों की उक्त रणनीति के 11 उद्देश्य बताए गए हैं। इसमें कहा गया है कि सभी देश अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी संगठनों को संगठित करने, उन्हें प्रशिक्षित करने या उन्हें वित्‍तीय आदि किसी भी तरह की सुविधा देने के लिए काम नहीं करेंगे। साथ ही सभी देश यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी जमीन या नागरिकों का इस्तेमाल किसी दूसरे देश में आतंकी घटनाओं के लिए नहीं हो।यही नहीं सभी देश इस तरह की घटनाओं में शामिल देशों की मदद भी नहीं करेंगे और राजनीतिक उद्देश्यों से आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों के खिलाफ एकजुट होंगे। एक अन्य महत्वपूर्ण उद्धेश्य यह है कि आतंकवाद का राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। ब्रिक्स देशों के बीच यह भी सहमति बनी है कि वे आतंकवाद का इस्तेमाल करने वाले देशों के खिलाफ एकजुट होंगे और उसे ऐसा करने से रोकने की रणनीति बनाएंगे।सूत्रों का कहना है कि ब्रिक्स देशों की ओर से बनाए गए नए एजेंडे में ऐसी बहुत सारी बातें हैं जो पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ भारत और चीन के बीच सहयोग की राह खोल सकता है। हालांकि देखना यह होगा कि चीन इसको लेकर कितनी गंभीरता दिखाता है। इससे पहले जैश सरगना मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र का प्रतिबंध लगाने जैसे मसले पर चीन ने भारत के प्रस्तावों का लंबे समय तक विरोध किया था।बहरहाल, अब यदि चीन इस तरह का कोई कदम उठाता है तो भारत के पास ब्रिक्स समझौते के तहत उसे याद दिलाने का एक और विकल्प होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा था कि अगले साल के दौरान बतौर ब्रिक्स अध्यक्ष भारत आतंकवाद के खिलाफ स्वीकृत रणनीति को और मजबूत बनाने की कोशिश करेगा। यानी यदि चीन अड़ंगा नहीं लगाता है तो पाकिस्‍तान में बैठे आतंकी संगठनों पर लगाम लगनी तय है... 

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