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आगामी चुनावों को लेकर भाजपा की नई रणनीति


🗒 रविवार, नवंबर 22 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
आगामी चुनावों को लेकर भाजपा की नई रणनीति

हाल फिलहाल की राजनीति में युवाओं का जो आकर्षण और समर्थन 2014 लोकसभा चुनाव में दिखा था, संभवत: वही उभार फिर से दिखेगा। खासकर भाजपा की आने वाले दिनों में युवाओं पर विशेष नजर रहेगी। युवा केंद्रित योजनाओं और कार्यक्रमों को भी धार मिलेगी। जाहिर है कि आगामी पश्चिम बंगाल चुनाव के मद्देनजर यह देखना रोचक होगा कि तृणमूल छोड़ रहे नेताओं के साथ साथ तृणमूल काडर का बहाव किस तरह होता है।यूं तो भाजपा में स्वभावत: युवाओं को बढ़ावा दिया जाता रहा है लेकिन कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से युवाओं को भाजपा से जुड़ने की अपील का खास अर्थ है। दरअसल 2014 के बाद विपक्ष ने जिस तरह रोजगार का मुद्दा बनाने की कोशिश की, उसमें युवाओं का एक वर्ग थोड़ा उदासीन भी होता चला गया है। हालांकि मोदी सरकार की ओर से कौशल विकास को प्राथमिकता देकर स्वरोजगार को बढ़ावा देने की कोशिशें हुईं, लेकिन ऐन चुनाव के वक्त पर विपक्ष सरकारी नौकरी का पासा फेंकता रहा है। ऐसे में जब बिहार फतह के बाद प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपील और भाजपा के अंदर आकर विकास की बात कही तो उसका व्यापक अर्थ था। दरअसल इसी सहारे भाजपा परिवारवाद के साथ साथ दूसरे दलों में युवाओं के मंद विकास और भाजपा में तेज विकास के मुद्दे को भी बहस में लाना चाहती है।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के अनुसार- 'भाजपा मे प्राकृतिक रूप से युवाओं का विकास होता है। भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या उस बंगलोर का प्रतिनिधित्व करते हैैं जहां एक युवा के रूप में कभी पूर्व मंत्री स्वर्गीय अनंत कुमार थे। अनंत कुमार उचाइयों तक पहुंचे अब तेजस्वी छोटी उम्र में सांसद हैं। भाजपा में ऐसे नेताओं की बहुत लंबी कड़ी है।' भाजपा अध्यक्ष का यह कथन संभवत: युवा मोर्चा के हर कार्यक्रम का सूत्रवाक्य बनने वाला है। दूसरे दलों से तुलना में यह भी बताया जा सकता है कि भाजपा का कोई भी जिलाध्यक्ष 45 से उपर का नहीं है और खुद नड्डा की केंद्रीय टीम की औसत आयु 50 वर्ष है। जबकि कांग्रेस समेत दूसरे दलों में स्थापित युवा नेता भी घुटन महसूस कर रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट, जितिन प्रसाद जैसे उदाहरण भी हैं जो या तो कांग्रेस छोड़ चुके या छटपटा रहे हैं।जाहिर है कि युवाओं को मजबूती से पार्टी के साथ जोड़ने के लिए जहां उदाहरण पेश किए जाएंगे वहीं कौशल विकास और दूसरे माध्यमों से युवाओं का एक बड़ा समर्थन वर्ग खड़ा किया जाएगा। ध्यान रहे कि 2014 में भाजपा से ऐसे प्रतिभाशाली पेशवर युवाओं की भीड़ जुड़ी थी जिनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी थी।चुनावी लिहाज से पश्चिम बंगाल में ही इसकी पहली झलक दिखेगी जहां बड़ी संख्या में तृणमूल नेता टूटकर भाजपा मे आने को तैयार दिख रहे हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस काडर की बड़ी भूमिका होती है जो चुनाव जिताते हैं। वैसे भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए प्रदेश में भाजपा को सबसे उपयुक्त माना जा रहा है जिसके पास पुराने नेता कम हैं। यानी 'साइलेंट महिला वोटर' के साथ साथ एक बार फिर से ही मुखर युवा समर्थक दिखना शुरू होगा।

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