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वैक्सीन के साथ और तेज होगी कोरोना डिप्लोमेसी, कोई भी देश वैक्सीन बनाये उसे भारत की लेनी होगी मदद


🗒 शनिवार, नवंबर 28 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
वैक्सीन के साथ और तेज होगी कोरोना डिप्लोमेसी, कोई भी देश वैक्सीन बनाये उसे भारत की लेनी होगी मदद

कोरोना ने अगर वैश्विक कूटनीति के ताने बाने को बहुत बदल दिया है तो इसने नए समीकरणों की जमीन भी तैयार कर दी है। ऐसा लगता है कि भारत ने इस हकीकत को समय रहते समझ लिया है और कोरोना डिप्लोमेसी को अपनी वैश्विक नीति का हिस्सा बना लिया है।कोरोना से लड़ाई में 150 से ज्यादा देशों को कई तरह से मदद मुहैया करा चुकी भारत सरकार वैक्सीन को भी अपनी कूटनीति में शामिल करने जा रही है।दुनिया के 190 देशों में फैले भारतीय दूतावास, उच्चायोग व अन्य मिशन अपनी मुहिम में लग गये हैं। भारत ना सिर्फ अपने कुछ पड़ोसी देशों को बल्कि दूर दराज के देशों को भी मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है।अगर पिछले कुछ दिनों के दौरान भारत व दूसरे देशों के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं को देखे तो भी यह स्पष्ट हो जाता है कि वैक्सीन पूरी बातचीत में सर्वोच्च वरीयता पर आ गया है। तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में सेशेल्स पहुंचे विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वहां के शीर्ष नेताओं से बात की तो उनसे वैक्सीन पर सहयोग का वादा मांगा गया। जयशंकर ने राष्ट्रपति वावेल रामकलावन को आश्वस्त किया कि वैक्सीन आपूर्ति में उनका देश भारत की सर्वोच्च वरीयता पर है।इसी तरह से गुरुवार (26 नवंबर, 2020) को काठमांडू में विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने नेपाल के नेताओं को आश्वस्त किया कि वैक्सीन आते ही नेपाल को वरीयता के तौर पर दिया जाएगा। भारत पहले ही एक अन्य पड़ोसी देश बांग्लादेश को वैक्सीन बनने के बाद तीन करोड़ डोज देने का वादा कर चुका है। मालदीव को भी आश्वासन भेजा जा चुका है।पाकिस्तान को छोड़कर तकरीबन अन्य सभी पड़ोसी देशों को वैक्सीन उपलपब्ध कराने को लेकर विमर्श शुरू हो चुका है। अभी अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, म्यांमार व नेपाल के डाक्टरों व चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों को प्रशिक्षण देने की शुरुआत भी भारत की मदद से कर दी गई है। यह प्रशिक्षण वैक्सीन की रख-रखाव, स्टोरेज के अलावा क्लिीनिकल ट्रायल से संबंधित है। इन सभी देशों ने आनुवंशिक समानताओं को देखते हुए किसी विकसित देश के मुकाबले भारत में बन रहे वैक्सीन पर ज्यादा भरोसा दिखाया भी है। भारतीय कंपनियों को दक्षिण एशियाई देशों से बड़ा आर्डर भी मिलने की संभावना है।विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि कोविड की शुरुआत से ही इस महामारी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर भारत ज्यादा सक्रिय रहा है। अब जबकि हमें लग रहा है कि अगले वर्ष की पहले एक दो महीनों में भारत के पास वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी तो हाल ही में विदेश सचिव श्रृंगला ने नई दिल्ली स्थित कई देशों के राजनयिकों को कोरोना के वैक्सीन पर भारत में हो रही प्रगति की जानकारी दी।मार्च, 2020 से ही भारत ने दूसरे देशों को हाइड्रोक्सोक्लोरोक्विन व पेरासीटामोल देना शुरू कर दिया था। अभी तक 150 देशों को इन दवाओं के साथ दूसरी दवाइयों, पीपीई, वैंटिलेटर आदि दिए गए हैं। दरअसल, भारत अभी किसी भी तरह का वैक्सीन बनाने में दुनिया का सबसे बड़ा देश है।कई जानकारों का कहना है कि चाहे कोई भी देश वैक्सीन बनाये उसे पूरी दुनिया में पहुंचाने के लिए भारत की वैक्सीन निर्माता कंपनियों की मदद चाहिए। चीन की तरफ से भी वैक्सीन डिप्लोमेसी हो रही है, लेकिन उसके साथ साख की समस्या है।

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