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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं किसान, कानून रद होने तक जारी रहेगा आंदोलन


🗒 मंगलवार, जनवरी 12 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं किसान, कानून रद होने तक जारी रहेगा आंदोलन

तीनों कृषि कानूनों को लेकर चार सदस्यीय कमेटी गठित करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को किसान नेताओं ने खारिज कर दिया। किसान नेताओं का कहना है कि वे किसी कमेटी के सामने नहीं जाएंगे। कानून को लेकर किसान कोर्ट में नहीं गए थे, सरकार की ओर से याचिका डाली गई थी। हालांकि किसान नेताओं ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आंदोलन के हक में दिए गए फैसले का स्वागत किया, लेकिन कमेटी के बारे में स्पष्ट कर दिया कि वे इससे सहमत नहीं हैं। साथ ही किसान नेताओं ने 15 जनवरी की वार्ता में शामिल होने की भी बात कही।सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुंडली बार्डर पर किसान नेता और संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य बलबीर सिंह राजेवाल, डा. दर्शनपाल, जगमोहन सिंह, जगजीत सिंह दल्लेवाल, प्रेम सिंह भंगू, रमिंदर पटियाल आदि ने पत्रकारों से बातचीत की। किसान नेताओं ने कहा कि कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी में जो चार नाम शामिल किए गए हैं, वे पहले से ही इन कानूनों के समर्थक रहे हैं। कानून के समर्थन में इनके लेख विभिन्न अखबारों में प्रकाशित होते रहे हैं। यही नहीं, न तो किसान सुप्रीम कोर्ट गए और न ही किसी कमेटी का कोई प्रस्ताव रखा, तो इसका क्या औचित्य है। यह कमेटी केवल विषय को भटकाने के लिए बनाई गई है। तीनों कानून संसद और भाजपा सरकार ने बनाए हैं। इसलिए हमारी लड़ाई सरकार से है। हमारी मांग कानून रद कराने की है, किसी कमेटी में बहस के लिए नहीं।कानून रद होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इसे और तेज किया जा सकता है। अभी दिल्ली के पांच रास्ते बंद हैं, भविष्य में 10 रास्ते भी बंद हो सकते हैं। इस आंदोलन को पूरे देश में भी फैलाया जाएगा। जहां तक कानूनों को स्थगित करने का सवाल है, तो यह कोई समाधान नहीं है। 15 की बैठक के बाद बनेगी ट्रैक्टर मार्च की रूपरेखा किसान नेता राजेवाल ने कहा कि 26 जनवरी के ट्रैक्टर मार्च को लेकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। हर जगह भ्रम फैलाया जा रहा है कि हम दिल्ली फतह करने जा रहे है, किसानों का ऐसा कोई इरादा नहीं है। लालकिला पर जाने का भी कार्यक्रम नहीं है और न ही किसान संसद में जाने की कोशिश करेंगे। ट्रैक्टर मार्च की रूपरेखा 15 जनवरी की बैठक के बाद तय होगी, लेकिन यह तय है कि आंदोलन की तरह मार्च भी शांतिपूर्ण होगा और शांतिभंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।राकेश टिकैत ने ट्वीट किया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित कमेटी के सभी सदस्य खुली बाजार व्यवस्था या कानून के समर्थक रहे हैं। अशोक गुलाटी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने ही इन कानून को लाये जाने की सिफारिश की थी। देश का किसान इस फैसले से निराश है। राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों की मांग कानून को रद्द करने व न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून बनाने की है। जब तक यह मांग पूरी नहीं होती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का परीक्षण कर कल संयुक्त मोर्चा आगे की रणनीति की घोषणा करेगा।

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