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कोरोना की मार से बेजार कामगार, मुंबई-पुणे से लौट रहे लोगों में लॉकडाउन का खौफ


🗒 रविवार, अप्रैल 11 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
कोरोना की मार से बेजार कामगार, मुंबई-पुणे से लौट रहे लोगों में लॉकडाउन का खौफ

महाराष्ट्र के मुंबई-पुणे से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जाने वाली ट्रेनों से आप्रवासी श्रमिकों और अन्य छोटे-मोटे कामकाज करने वालों का घर लौटना जारी है। इनमें ज्यादातर कोरोना की वजह से काम-धंधा नहीं मिलने और लॉकडाउन के खौफ के कारण वापस घर जा रहे हैं। कई लोग परिवार में शादी के चलते और कई खेती के कामों के लिए भी घर लौट रहे हैं। हालांकि ज्यादातर आप्रवासियों का कहना है कि यदि मुंबई और पुणे जैसे शहरों में ठीक-ठाक काम मिल रहा होता तो शायद वापस नहीं जाते।रविवार दोपहर तीन बजे भोपाल स्टेशन से गुजरी लोकमान्य तिलक टर्मिनस-गोरखपुर ट्रेन खचाखच भरी थी। गोरखपुर जा रहे 50 वर्षीय फयाजुद्दीन ने बताया कि अभी वह जमीन की नपाई कराने जा रहे हैं। मुंबई में काम मंदा चल रहा है। कोरोना की वजह से जिस तरह का माहौल बना है, उस कारण गांव की जमीन को वह जीवनयापन के विकल्प के रूप में देख रहे हैं।मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित बड़वानी जिले से होते हुए पिछले कई दिनों से श्रमिक उत्तर प्रदेश और बिहार जा रहे हैं। आपदा के समय में भी इनसे बस वाले दो से ढाई गुना अधिक किराया ले रहे हैं। पुणे में गैरेज पर काम करने वाले विजय मौर्य ने बताया कि दिक्कतें बढ़ने लगीं तो पत्नी को लेकर उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर स्थित अपने घर जा रहे हैं। सुभाष यादव भी पुणे में काम करते थे। गुजर-बसर में मुश्किल होने लगी तो बस्ती जिला स्थित घर के लिए निकल पड़े।बड़ी संख्या में आप्रवासी मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले से भी होते हुए अपने घरों को जा रहे हैं। हालांकि इनमें से कई के लौटने की वजह कोरोना नहीं है। बस में सफर कर रहे 24 परिवारों में से एक परिवार के मुकेश यादव निवासी गोरखपुर ने बताया कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लोग सूरत से प्रयागराज, बस्ती व अन्य जिलों के गांवों व शहरों को जा रहे हैं। कोई खेती के काम से तो कोई परिवार में शादी-ब्याह के कारण जा रहा है।उत्तर प्रदेश के बलरामपुर निवासी लालबाबू ने बताया कि मुंबई में मजदूरी करता हूं। वहां आंशिक लॉकडाउन है। घर में शादी है, तो सोचा शादी में ही चला जाऊं। मुंबई में पान का ठेला लगाने वाले सुल्तानपुर के ओमकार प्रसाद ने कहा कि व्यवसाय में कोई खास तेजी नहीं थी, बीमारी की चिंता अलग है इसलिए वापस जा रहा हूं।पुणे स्पेशल ट्रेन से बिहार के दानापुर पहुंचे मधुबनी निवासी विजय कुमार ने कहा कि पिछली दफा दूसरों से मांगकर खाना पड़ा था। जैसे-तैसे ट्रक में खड़े होकर गांव पहुंचे थे। फिर वहां वैसी ही स्थिति है। सोचा कि हालात और खराब हों, इससे पहले गांव पहुंच जाएं। वहीं, पुणे के एक होटल में काम करने वाले विजय कुमार का कहना है कि लोगों को डर है कि लॉकडाउन लग जाएगा। इसीलिए गांव लौट रहे हैं।पटना के मीठापुर के रहने वाले प्रेम पुणे में ठेकेदारी करते हैं। कोरोना की वजह से श्रमिक चले गए, तो प्रेम भी पटना लौट आए। परिवार के साथ लौटे मो. राजू बोले कि पिछले साल मई में मुश्किल से दानापुर पहुंचे थे। आज फिर उसी स्टेशन पर स्पेशल ट्रेन से उतरे हैं। दरभंगा के मो. कादिर ने बताया कि पुणे में कड़ी पाबंदियां लगाने से लोगों के सामने मुसीबत आ गई है। कहीं काम नहीं मिल रहा। अब तभी लौटेंगे, जब सब कुछ सामान्य हो जाएगा।प्रयागराज और गोरखपुर सहित उत्तर प्रदेश के अन्य स्टेशनों पर भी महाराष्ट्र से आप्रवासी पहुंच रहे हैं। गोरखपुर में लोकमान्य तिलक टर्मिनस मुंबई स्पेशल ट्रेन से आए 465 यात्रियों में छह पाजिटिव पाए गए। इस बीच, रेलवे बोर्ड ने गोरखपुर के लिए तीन जोड़ी और अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों को चलाने की हरी झंडी दे दी है।रविवार को कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर लोकमान्य तिलक टíमनस से लखनऊ जाने वाली ट्रेन से लौटे यात्रियों ने बताया कि मुंबई के हालात बदतर हो चुके हैं। उन्नाव निवासी मुन्ना ने बताया कि मुंबई में लॉकडाउन वाले हालात हैं। गरीबों को इलाज नहीं मिल रहा है। इसलिए जिंदगी बचाने को घर लौट आए। लालगंज के राजबहादुर, भगवंत नगर के अब्दुल रज्जाक, फतेहपुर के राहुल कुमार सिंह, बांदा के पंकज, चित्रकूट के मानिकपुर के रेहुंटिया के अखिलेश सिंह, कन्नौज के वसीम, उन्नाव के प्रेमशंकर आदि कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर उतरे तो राहत की सांस ली

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