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भारत में आपकी नीति नहीं कानून का शासन ही सर्वोच्च - ट्विटर


🗒 शुक्रवार, जून 18 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
भारत में आपकी नीति नहीं कानून का शासन ही सर्वोच्च - ट्विटर

नई दिल्ली, । ट्विटर पर शिकंजा कसता जा रहा है। संसद की स्थायी समिति ने भी नए आइटी कानूनों के पालन में ट्विटर के रवैये से नाखुशी जाहिर की। सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को समिति ने ट्विटर से पूछा कि उनकी कंपनी के नियम ज्यादा महत्वपूर्ण हैं या देश का कानून ज्यादा महत्वपूर्ण है। ट्विटर के प्रतिनिधियों ने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि उनके लिए ट्विटर के नियम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इस जवाब से नाराज समिति ने ट्विटर को हर हाल में भारत के कानून का पालन करने को कहा।सूत्रों के मुताबिक ट्विटर से सवाल-जवाब के दौरान समिति ने यहां तक कह डाला कि देश के कानून का उल्लंघन करने के लिए क्यों नहीं उन पर जुर्माना लगाया जाए।कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली आइटी मंत्रालय की स्थायी समिति ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के गलत इस्तेमाल और उसकी रोकथाम एवं नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा खास कर डिजिटल दुनिया में महिलाओं की सुरक्षा और मर्यादा के साथ होने वाले खिलवाड़ को लेकर पूछताछ के लिए ट्विटर को तलब किया था। ट्विटर इंडिया की पब्लिक पालिसी मैनेजर शगुफ्ता कामरान और विधि सलाहकार आयुषि कपूर ट्विटर का पक्ष रखने के लिए हाजिर हुई।सूत्रों के मुताबिक, समिति के सदस्यों की तरफ से पूछताछ के दौरान ट्विटर की तरफ से कहा गया कि वे अपनी नीति के मुताबिक काम करते हैं और उसका पालन करते हैं। इस पर समिति ने घोर आपत्ति जाहिर करते हुए ट्विटर से कहा कि देश का कानून सर्वोच्च है न कि उनकी नीति। सूत्रों के मुताबिक समिति की तरफ से ट्विटर इंडिया के अधिकारियों से कुछ सख्त सवाल भी पूछे गए लेकिन ट्विटर की तरफ से उसके स्पष्ट जवाब नहीं दिए गए।बताया जाता है कि एक सदस्य निशिकांत ने ट्विटर इंडिया की पूरी कार्यप्रणाली और चेन पर भी सवाल पूछा जिसका जवाब नहीं आया। उसके फैक्ट चैकिंग मैकेनिज्म और उसमें शामिल लोगों पर भी सवाल पूछा गया जिस पर संतोषप्रद जवाब नहीं आया।गौरतलब है कि पांच जून को आइटी मंत्रालय की तरफ से ट्विटर को सोशल मीडिया इंटरमीडियरी के नियमों के पालन को लेकर अंतिम चेतावनी जारी की गई थी। 25 मई इंटरनेट मीडिया के नए दिशा-निर्देशों के पालन की अंतिम तारीख थी। इस निर्देश का पालन नहीं करने से ट्विटर अपनी इंटरमीडियरी का दर्जा खो चुकी है, जिससे ट्विटर पर चलने वाले कंटेंट को लेकर अगर कोई विवाद या मुकदमा होता है तो उसमें ट्विटर को भी पक्षकार बनाया जाएगा। इंटरमीडियरी रहने पर पक्षकार नहीं बनना पड़ता है।

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