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मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में चुनावी राज्यों का रखा गया पूरा ख्याल


🗒 बुधवार, जुलाई 07 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में चुनावी राज्यों का रखा गया पूरा ख्याल

नई दिल्ली। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले कैबिनेट विस्तार से आप इस बात का भी अंदाजा लगा सकते हैं कि अगले एक-दो वर्षो में किन-किन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। राजनीतिक तौर पर जो राज्य जितनी अहमियत रखता है उसे उसी हिसाब से कैबिनेट में तवज्जो दी गई है। इसके साथ ही केंद्र सरकार में बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की अभी तक की कम प्रतिनिधित्व की भरपाई भी की गई है। सरकार के लिए बेहद अहम राज्य उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष की शुरुआत में चुनाव होने वाला है और कैबिनेट विस्तार में सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व इसी राज्य से है।उत्तर प्रदेश के लोकसभा व राज्य सभा के कुल सात सदस्यों को सरकार में शामिल किया गया है। इन सात लोगों के चयन में जातिगत समीकरण का भी पूरा ख्याल रखा गया है। पीएम नरेंद्र मोदी व रक्षा मंत्री राजनाथ ¨सह के अलावा महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, कौशल विकास व उद्यमिता मंत्री डा.महेंद्र नाथ पांडे समेत आठ मंत्री पहले से ही हैं। अब मोदी सरकार में देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा प्रतिनिधित्व हो गया है।उत्तर प्रदेश में चुनाव के कुछ महीनों बाद गुजरात में भी चुनाव है और संभवत: वहां के राजनीतिक समीकरण को साधने के लिए ही मंत्रिमंडलीय विस्तार में तीन नए चेहरे शामिल किए गए हैं। इसके अलावा गुजरात के दो राज्य मंत्रियों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है।उत्तर प्रदेश से महाराजगंज से सांसद पंकज चौधरी, मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल, आगरा के सांसद डा. सत्य पाल सिंह बघेल, जालौन के सांसद भानु प्रताप सिंह वर्मा, मोहनलालगंज के सांसद कौशल किशोर, खीरी के सांसद अजय कुमार और राज्य सभा सांसद बी एल वर्मा ने राष्ट्रपति भवन में पद व गोपनीयता की शपथ ली। इनमें चार कुर्मी जाति का प्रतिनिधित्व करते हैं जबकि दो दलित हैं और एक ब्राह्मण है। एक साथ चार कुर्मी जाति के सांसदों का शामिल करने को भाजपा की तरफ से दो दर्जन से ज्यादा संसदीय सीटों पर दावेदारी को मजबूत करने के तौर पर देखा जा रहा है। यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि बुधवार के विस्तार के बाद मोदी सरकार के 77 मंत्रियों में से 15 उत्तर प्रदेश से हैं।बंगाल से चार सांसदों को मंत्रिपरिषद में जगह दी गई है जबकि सरकार में पहले से शामिल इस राज्य के दोनों मंत्रियों बाबुल सुप्रियो और देवाश्री चौधरी को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। सरकार में शामिल चार नए चेहरे शांतनु ठाकुर, जान बारला, नीतिश प्रमाणिक और सुभाष सरकार हैं।माना जा रहा है कि हाल ही में संपन्न विधान सभा चुनाव में सुप्रियो और चौधरी के लचर प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें बाहर किया गया है। इन दोनों की जगह पर जिन चार नए चेहरों को शामिल किया गया उन्हें बंगाल के लिए भाजपा की नई राजनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें एक तरफ मतुआ समुदाय के सांसद शांतनु ठाकुर को प्रतिनिधित्व दिया गया है। वे बंगाल के उत्तरी क्षेत्र में अलीपुरद्वार के सांसद हैं और उन्हें पार्टी इस क्षेत्र की राजनीति में अपना नया चेहरा बनाने की मंशा रखती है।इसी तरह से कूचबिहार के युवा सांसद और टीएमसी नेता ममता बनर्जी के पूर्व सहयोगी नीतिश प्रमाणिक को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा ने टीएमसी नेता को यह संकेत दिया है कि विधान सभा हार के बाद की राजनीति शुरू हो गई है। प्रमाणिक मोदी सरकार के सबसे युवा मंत्री भी होंगे।गुजरात में नवंबर-दिसंबर, 2022 में चुनाव होना है और उसके पहले दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना कम ही है। यही वजह है कि राज्य का प्रतिनिधित्व केंद्र सरकार में बढ़ाया गया है। तीन नए चेहरे दर्शना विक्रम (सूरत), डा.महेंद्रभाई मुंजापारा (सुरेंद्रनगर)और चौहान देव सिंह (खेड़ा) को शामिल करने के साथ ही दो राज्य मंत्रियों मनसुख मांडविया और पुरुषोत्तम रूपाला का दर्जा बढ़ा कर उन्हें कैबिनेट मंत्री बना दिया गया है। महाराष्ट्र में चुनाव तो अभी दूर है लेकिन वहां से चार नए लोगों नारायण राणे, भागवत कृष्णा राव कराड, डा.भारती प्रवीण और कपिल मोरेश्वर पाटिल को शामिल किया गया है। 48 लोकसभा सीटों वाले इस बड़े राज्य का प्रतिनिधित्व अभी तक मोदी सरकार में कम माना जा रहा था। चार नए लोगों के आने से अब पार्टी राज्य को पूरा प्रतिनिधित्व देने का दावा कर सकती है।

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