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सुप्रीम कोर्ट ने दी हिदायत, आइटी नियम पढ़कर पूरी तैयारी से आएं


🗒 मंगलवार, जुलाई 13 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
सुप्रीम कोर्ट ने दी हिदायत, आइटी नियम पढ़कर पूरी तैयारी से आएं

नई दिल्ली,। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इंटरनेट मीडिया पर नफरत फैलाने वाले और इस्लामोफोबिया के संदेशों पर रोक और कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई एक सप्ताह टालते हुए याचिकाकर्ता से कहा कि वह नए आइटी नियमों को पढ़कर पूरी तैयारी से आएं तब मामले पर सुनवाई की जाएगी। मामले की सुनवाई टालते हुए ये टिप्पणी प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने की।कोर्ट ने याचिका पर स्वयं बहस कर रहे याचिकाकर्ता वकील ख्वाजा अइजाजुद्दीन से कहा कि क्या आपने नए आइटी नियम पढ़े हैं। आप जो मांग कर रहे हैं उसमें ये चीज है। वकील ने कहा कि नए आइटी नियमों में इस चीज को कवर नहीं किया गया है जिसकी वह मांग कर रहा है। नए आइटी रूल में धर्म (रिलीजन) के बारे में कुछ नहीं कहा गया है।जस्टिस रमना ने कहा कि आइटी रूल दिखाइए कहां है। वकील ने कहा कि नए आइटी रूल को उसने फाइल में नहीं लगाया है। कोर्ट का अगला सवाल था कि क्या आप अपनी मांग के बारे में सरकार के पास गए थे। वकील ने कहा नहीं। इस पर पीठ ने कहा कि तो फिर आपकी इस याचिका पर कोर्ट क्यों सुनवाई करे। वैसे भी तब्लीगी जमात के मामले में पहले से एक याचिका सुप्रीम कोर्ट मे लंबित है तो फिर इस नई याचिका पर क्यों सुनवाई की जाए।वकील ने कहा कि उस लंबित मामले में तबलीगी जमात के बारे में मीडिया रिपोर्टिग का मुद्दा है, जबकि उनकी याचिका उससे भिन्न है। वकील ने कोर्ट से आग्रह किया कि उनकी याचिका पर नोटिस जारी कर दिया जाए और इसे भी तब्लीगी जमात के मामले में दाखिल याचिका के साथ सुनवाई के लिए संलग्न कर दिया जाए।लेकिन पीठ इसके लिए राजी नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि आप पूरी तैयारी के साथ होमवर्क करके और आइटी नियम पढ़ कर आइयेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाल दी।इस याचिका में पिछले वर्ष दिल्ली में फैले कोरोना के पीछे तब्लीगी जमात को जिम्मेदार ठहराए जाने का मुद्दा उठाया गया है। इंटरनेट मीडिया पर नफरत फैलाने वाले और इस्लामोफोबिया के संदेश पर रोक लगाने और कार्रवाई की मांग की गई है। वैसे ये पहला मौका नहीं है, जब कोर्ट ने किसी याचिकाकर्ता से पूरी तैयारी से आने की बात कही हो। इससे पहले भी कई बार कई मामलों में आधी अधूरी जानकारी और तैयारी से याचिका दाखिल करने वालों को कोर्ट इस तरह की नसीहत दे चुका है।

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