यूनाइट फॉर ह्यूमैनिटी हिंदी समाचार पत्र

RNI - UPHIN/2013/55191 (साप्ताहिक)
RNI - UPHIN/2014/57987 (दैनिक)
RNI - UPBIL/2015/65021 (मासिक)

मृतक के करीबी रिश्तेदार की साक्ष्य महत्ता खारिज नहीं की जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट


🗒 शुक्रवार, सितंबर 03 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
मृतक के करीबी रिश्तेदार की साक्ष्य महत्ता खारिज नहीं की जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि किसी करीबी रिश्तेदार या गवाह बनने के इच्छुक व्यक्ति की साक्ष्य महत्ता इस आधार पर खारिज नहीं की जानी चाहिए कि उसका मृतक या मृतका के साथ जुड़ाव रहा है। कानून उन्हें गवाह के तौर पर पेश करने के अयोग्य नहीं मानता।जस्टिस एसए नजीर और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने यह टिप्पणी गुजरात हाई कोर्ट के एक आदेश को बरकरार रखते हुए की जिसमें उसने एक व्यक्ति और उसकी मां को आइपीसी की धारा-306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) और धारा-498ए (महिला के पति या पति के रिश्तेदार द्वारा क्रूरता) के तहत दोषी मानते हुए दो साल कैद की सजा सुनाई थी।शीर्ष अदालत ने कहा कि अक्सर विवाहित महिला के साथ क्रूरता का अपराध घर की चहारदीवारी के अंदर होता है जिससे किसी स्वतंत्र गवाह की उपलब्धता की संभावना क्षीण हो जाती है। लिहाजा घरेलू क्रूरता की पीडि़ता का अपने माता-पिता, भाई-बहनों और अन्य करीबी रिश्तेदारों के साथ अपनी पीड़ा को साझा करना कतई अस्वाभाविक नहीं है। पीठ ने कहा कि जब अदालत को किसी गवाह बनने के इच्छुक व्यक्ति की गवाही की अनुमति देनी पड़े तो उसे उसकी गवाही का आकलन करने में बेहद सतर्क रहना होगा या अन्य शब्दों में गवाह बनने के इच्छुक व्यक्ति की गवाही की अत्याधिक सावधानी और सतर्कता से जांच की जरूरत होगी।इस मामले में गुमान सिंह चौहान ने 27 अप्रैल, 1997 को विवाह किया था। विवाह के बाद से वह भैंसें खरीदने के लिए पत्नी पर उसके पिता से 25 हजार रुपये लाने की मांग कर रहा था। इसके लिए वह उसके साथ मारपीट करता था और उसकी मां झगड़ा करती थी। तंग आकर उसकी पत्नी ने 14 दिसंबर, 1997 को जहर खाकर अपने ससुराल में ही आत्महत्या कर ली थी।