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अफगानिस्तान न बने आतंक की एक और पनाहगाह


🗒 गुरुवार, सितंबर 09 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
अफगानिस्तान न बने आतंक की एक और पनाहगाह

नई दिल्ली, दुनिया के पांच बड़े देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के संगठन ब्रिक्स ने अफगानिस्तान के हालात को लेकर चिंता जताई है और इस देश को आतंकवाद की पनाहगाह बनने से रोकने की अपील की है। ब्रिक्स देशों के प्रमुखों की गुरुवार को बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की। ब्रिक्स देशों के प्रमुखों में से सिर्फ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने भाषण में अफगानिस्तान के हालात का सीधे तौर पर जिक्र किया, लेकिन सभी देशों की तरफ से बाद में बताया गया कि आंतरिक चर्चा में अफगानिस्तान एक बड़ा मुद्दा रहा। बैठक में आतंकवाद और कोरोना महामारी को लेकर सहयोग पर भी चर्चा हुई।बैठक के बाद जारी घोषणा पत्र में अफगानिस्तान में सत्ता हासिल करने वाले तालिबान से परोक्ष तौर पर उम्मीद जताई गई कि वहां दूसरे देशों में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने से वाले संगठनों को पनपने नहीं दिया जाएगा। इस तरह से रूस, चीन और भारत ने खास तौर पर अपनी चिंताओं को सामने रखा। बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात की जानकारी दी कि ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के खिलाफ एक कार्य योजना को स्वीकृति दे दी है। इस कार्य योजना का प्रस्ताव भारत की तरफ से ही किया गया था। ब्रिक्स की यह 15वीं सालाना बैठक थी और भारत इस साल के लिए इसका अध्यक्ष है।प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग लंबे समय बाद एक ही वर्चुअल मंच पर आमने-सामने थे। दोनो देशों के बीच चल रहे सीमा विवाद का साया न तो बैठक के आयोजन में दिखा और न ही गुरुवार को शिखर बैठक में इसकी कोई झलक दिखी। प्रधानमंत्री मोदी ने चीन समेत सभी देशों को बैठक को सफल बनाने में मिले सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।दूसरी तरफ चीन के राष्ट्रपति चिनफिंग ने भी सफल आयोजन के लिए भारत को धन्यवाद दिया। मोदी और चिनफिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सेनारो और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति साइरल रामाफोसा ने भी बैठक में ब्रिक्स को आगे भी एक सफल संगठन बनाने में हर सहयोग देने की बात कही।ब्रिक्स देशों के घोषणा पत्र में आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई और वैश्विक स्तर पर और गहरे सहयोग की बात है, लेकिन इस साल के घोषणा पत्र में आतंकी संगठनों का नाम नहीं है, जिसके खिलाफ ये देश कार्रवाई करने का मुद्दा उठाते रहे हैं। इसमें यह जरूर है कि ब्रिक्स देशों के बीच आतंकवाद के खिलाफ एक रणनीति बनाने पर सहमति बनी है, जिसके तहत एक कार्य योजना को हरी झंडी दिखाई गई है।माना जा रहा है कि भारत अब पाकिस्तान समìथत आतंकी संगठनों के खिलाफ चीन और दूसरे ब्रिक्स देशों का ज्यादा समर्थन हासिल कर सकता है। अफगानिस्तान की स्थिति पर चिंता जताते हुए घोषषणा पत्र में सभी पक्षों से कहा गया है कि वे शीघ्रता से हिंसा का रास्ता छोड़कर हालात का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से निकालने की कोशिश करें। वहां स्थायित्व के लिए अफगानिस्तान के सभी पक्षों के बीच बातचीत को ब़़ढावा देने के साथ ही हाल में हामिद करजई हवाई अड्डे पर हुए आतंकी हमले की निंदा की गई है।ब्रिक्स ने उम्मीद जताई कि अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को प्राथमिकता दी जाएगी। इस लड़ाई में अफगानिस्तान को दूसरे देशों में आतंकी हमला करने वालों का पनाहगार नहीं बनने दिया जाएगा। साथ ही अफगानिस्तान को नशा उत्पादों के कारोबार का केंद्र नहीं बनने दिया जाएगा। वहां अफगानी महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाए जाएंगे।

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