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कुछ को छोड़ देश के इन राज्यों में अब भी है बिजली का संकट


🗒 सोमवार, अक्टूबर 11 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
कुछ को छोड़ देश के इन राज्यों में अब भी है बिजली का संकट

नई दिल्ली। कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से उत्तर भारत के कई राज्यों में अब भी बिजली संकट गहराया हुआ है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश व बिहार में स्थिति ज्यादा खराब है। राजस्थान में भी हालात बिगड़ गए थे, मगर अब वहां स्थिति सुधर रही है। हरियाणा, झारखंड व हिमाचल प्रदेश में अभी किसी प्रकार की समस्या नहीं है।बिहार को अभी औसतन 5800 से 6000 मेगावाट बिजली की जरूरत है, मगर सोमवार 5200 मेगावाट की आपूर्ति हुई। राज्य के अर्धशहरी व ग्रामीण इलाकों में छह से आठ घंटे तक लोडशेडिंग करना पड़ा। मध्य प्रदेश के संजय गांधी ताप विद्युत संयंत्र बिरसिंहपुर पाली में 210 मेगावाट की एक और यूनिट सोमवार को बंद हो गई। इससे पहले इसी संयंत्र की दो नंबर यूनिट रविवार रात बंद हो गई थी। यह यूनिट भी 210 मेगावाट उत्पादन की थी। प्रदेश में बिजली की कमी के चलते सोमवार को प्रदेश सरकार ने 242 मेगावाट बिजली ओवर ड्रा की। पंजाब में अलग-अलग जिलों में सोमवार को दिन में दो से पांच घंटे तक बिजली सप्लाई बाधित रही। निजी थर्मल प्लांटों में केवल डेढ़ दिन के लिए कोयला शेष है। प्रदेश में करीब चार हजार मेगावाट बिजली की कमी है। आम उपभोक्ताओं व औद्योगिक क्षेत्र पर इसका प्रभाव पड़ रहा है। उत्तराखंड में घोषित बिजली कटौती की कोई अवधि निर्धारित नहीं है। छत्तीसगढ़ को रोजाना 6,210 टन कोयला कम मिल रहा है। इससे संयंत्रों में कोयला का स्टाक (भंडारण) कम हो गया है। इसका असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है। नियमानुसार संयंत्रों में पांच दिन का कोयला होना चाहिए, लेकिन मड़वा को छोड़कर बाकी संयंत्रों में चार दिन से कम का कोयला बचा है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को आलाधिकारियों के साथ बैठक लेकर स्थिति की समीक्षा की।राजस्थान में कोयले की कमी और पावर प्लांटों के बंद होने से उत्पन्न हुए बिजली संकट में सोमवार को कुछ सुधार रहा है। कोयले की सप्लाई मिलने के साथ ही कोटा ताप बिजली घर की यूनिट संख्या छह में 195 मेगावाट, काली सिंध थर्मल की यूनिट संख्या दो में 600 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो गया है। राज्य में 9,353 मेगावाट बिजली का उपलब्ध हुई है, जबकि 12 हजार मेगावाट की अधिकतम मांग है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में सोमवार को भी बिजली की कटौती जारी रही ।कोरोना काल में आक्सीजन संकट से देश को उबारने में झारखंड ने अहम भूमिका निभाई थी। अब देश के पावर प्लांटों में जब कोयले की कमी हुई और बिजली संकट बढ़ा तो इसे दूर करने को फिर झारखंड ने मोर्चा संभाल लिया है। कोल इंडिया की पहल पर झारखंड की कोल कंपनियां पावर प्लांटों को पूरी शिद्दत से कोयले की सप्लाई में जुट गई हैं। हिमाचल प्रदेश में इन दिनों बिजली की कटौती नहीं हो रही। प्रदेश में वर्तमान में बिजली की मांग 295 लाख यूनिट प्रतिदिन है। वहीं, बिजली की आपूर्ति भी लगभग इतनी ही है। प्रदेश से 80 लाख यूनिट बिजली प्रतिदिन दूसरे प्रदेशों को बेची जा रही है। बिजली के एक यूनिट का दाम औसतन 12 रुपये मिल रहा है।

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