अमित शाह ने उद्योगपतियों को पूर्वोत्तर में निवेश के लिए किया आमंत्रित

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अमित शाह ने उद्योगपतियों को पूर्वोत्तर में निवेश के लिए किया आमंत्रित


🗒 गुरुवार, नवंबर 25 2021
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
अमित शाह ने उद्योगपतियों को पूर्वोत्तर में निवेश के लिए किया आमंत्रित

नई दिल्ली। पिछले सात साल में पूर्वोत्तर भारत में आई राजनीतिक स्थिरता, शांति और आधारभूत संरचनाओं के विकास का हवाला देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उद्योगपतियों को यहां निवेश के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि हम तीन 'ई'-एंपैथी, एंपावरमेंट, एनेबलर (सहानुभूति, सशक्तीकरण, सक्षम बनाने वाला) के साथ इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं।इंडियन चैंबर्स आफ कामर्स की सालाना आम बैठक को संबोधित करते हुए शाह ने गुरुवार को कहा कि 2024 तक पूर्वोत्तर भारत के सभी राज्यों की राजधानियां हवाई मार्ग से जुड़ जाएंगी, आठ में से सात राजधानियां रेल मार्ग से जुड़ जाएंगी और दो साल के भीतर बांग्लादेश के बंदरगाहों से जोड़ने का काम भी पूरा हो जाएगा। इससे दुनिया के बाजार तक पूर्वोत्तर भारत की पहुंच बढ़ जाएगी। पूर्वोत्तर भारत का सशक्तीकरण' विषय पर बोलते हुए शाह ने विस्तार से बताया कि किस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल से 2014 के बाद पूर्वोत्तर में शांति और स्थिरता कायम की गई है और विकास योजनाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है। इस सिलसिले में उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय विभिन्न अलगाववादी गुटों के साथ समझौतों और बड़ी संख्या में उनके कैडर के आत्मसमर्पण का हवाला दिया।उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के दौरान पूर्वोत्तर भारत का देश के अन्य भागों से अलगाव खत्म करने में काफी हद तक सफलता मिली है। पूर्वोत्तर भारत में निवेश की संभावनाओं की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने खुद को पूरी तरह आर्गेनिक राज्य घोषित कर दिया है, वहीं अन्य राज्य इसे बढ़ावा देने में जुटे हैं। उनके अनुसार आर्गेनिक उत्पादों की पूरी दुनिया में भारी मांग है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत में आइटी (सूचना प्रौद्योगिकी) क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं।शाह ने बताया कि पूर्वोत्तर भारत में शांति और स्थिरता लाने के बाद मोदी सरकार अब इसे बाढ़ मुक्त बनाने पर काम कर रही है। इसके लिए इसरो की सहायता से बड़ी संख्या में प्राकृतिक तालाब तैयार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पिछले सात साल में पूर्वोत्तर भारत में आधारभूत संरचनाओं के निर्माण पर 2.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं और अन्य परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है।

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