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राजधानी में 21 साल पहले शहीद हुए दारोगा आरके सिंह की जांबाजी और शौर्य की याद AK 47 को देख भी नहीं हिले थे कदम, छह गोलियां खाने के बाद भी डॉन को दबोचे रहे


🗒 गुरुवार, अक्टूबर 18 2018
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

 राजधानी में 21 साल पहले शहीद हुए दारोगा आरके सिंह की जांबाजी और शौर्य को याद कर आज भी पुलिस कर्मियों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। माफिया डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला से हजरतगंज स्थित जनपथ मार्केट में हुई मुठभेड़ के दौरान सिर में छह गोलियां लगने के बाद भी करीब 10 मिनट तक मोर्चा संभाले रहे थे। उधर, मार्केट के दूसरे गेट पर मुठभेड़ में लगे पुलिस टीम का नेतृत्व कर रहे आइपीएस राजेश कुमार पांडेय और उनके साथियों ने माफिया डॉन के दाहिने हाथ कहे जाने वाले तुनियांराम को मार गिराया था। 

राजधानी में 21 साल पहले शहीद हुए दारोगा आरके सिंह की जांबाजी और शौर्य की याद AK 47 को देख भी नहीं हिले थे कदम, छह गोलियां खाने के बाद भी डॉन को दबोचे रहे

आइपीएस राजेश पांडेय बताते हैं कि नौ सितंबर 1997 की शाम सूचना मिली माफिया डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला गिरोह के शातिर अपराधियों के साथ हजरतगंज जनपथ मार्केट स्थित बाम्बे हेयर कटिंग सैलून पहुंच रहा है। उसके साथ में जो अपराधी हैं उनके पास एके 47 और पिस्टल भी है। इस पर एएसपी पश्चिम सत्येंद्र वीर सिंह के पेशकार दारोगा रवींद्र कुमार सिंह, गनर रणकेंद्र सिंह के साथ जनपथ मार्केट पहुंचे। कुछ देर बाद पांच लोग आते दिखाई दिए।आशंका पर आगे झोला लेकर चल रहे बदमाश को रोकने का प्रयास किया गया तो वह भिड़ गया। इस पर बदमाश से भिड़कर उसे गिरा दिया। झोला हाथ से छूटा तो उसमे एके 47 रखी थी। श्रीप्रकाश शुक्ला दो अन्य बदमाशों के साथ उनके पीछे था। खुद को फंसता देख श्रीप्रकाश शुक्ला दो अन्य साथियों के साथ पीछे के रास्ते भागने लगा। दारोगा रवींद्र कुमार ने उनका पीछा किया और पिछले गेट पर श्रीप्रकाश शुक्ला को दबोच लिया। आइपीएस राजेश पांडेय ने बताया कि उनकी और रणकेंद्र की मार्केट के अंदर बदमाश से भिड़ंत चल रही थी। बाहर रवींद्र कुमार ने श्रीप्रकाश शुक्ला व उसके साथियों से लोहा लिए थे।उन्होंने मार्केट के अंदर बदमाश को मार गिराया। इस बीच बाहर गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई थी। वह भाग कर पहुंचे तो श्रीप्रकाश और उनके साथी भागते दिखाई दिए। जबकि दारोगा रवींद्र खून से लथपथ हालत में तड़प रहे थे। तत्काल पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देकर दारोगा रवींद्र को अस्पताल पहुंचाया गया। जहां, डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रवींद्र के सिर में छह गोलियां और दो सीने में लगी थी। जानकारी करने पर पता चला कि श्रीप्रकाश को रवींद्र ने दबोच रखा था। तब उसके साथियों ने दारोगा रवींद्र की पिस्टल छीन ली थी और उन पर गोलियां बरसा दी थी। छह गोलियां सिर में लगने के बाद भी दारोगा रवींद्र निढाल नहीं हुए। अंत में दो गोलियां और मारी जिसके बाद बहादुर दारोगा पस्त होकर गिर पड़े थे। मारा गया खूंखार अपराधी बिहार का रहने वाला तुनियाराम था।  आइपीएस राजेश पांडेय ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला जनपथ मार्केट स्थित बाम्बे हेयर कटिंग सैलून और ताज होटल स्थित एक सैलून में दाढ़ी बनवाने जाता है। चार दिनों से दोनों जगह जाल बिछाया जा रहा था पर वह नहीं मिला। नौ सितंबर को पुख्ता सूचना मिली कि वह जनपथ मार्केट पहुंच रहा है। इस पर टीम के साथ घेराबंदी की गई थी। 

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