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पीलीभीत की आबादी में घूमते दो तेंदुओं के आतंक से परेशान किसान


🗒 बुधवार, अगस्त 16 2017
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

पूरे जिले में बाघ का आतंक कायम है। साथ ही तेंदुए गांव भीतर तक जाकर झपट्टा मार रहे हैं। कंजिया सिंहपुर गांव में अचानक सुबह दो तेंदुए आ धमके। यह तेंदुए कई दिन से आसपास के गांवों में आतंक का पर्याय बने हैं। वन विभाग कर्मचारियों ने इन्हें पकड़ने का कोई उच्त इंतजाम नहीं किया है। आज इनका निशाना कोई ग्रामीण नहीं बन सका बल्कि पशुओं पर झपट्टा मारकर जख्मी कर दिया। इस दौरान जिले में आतंक फैला रहा बाघ पकड़ से दूर है। 

पीलीभीत की आबादी में घूमते दो तेंदुओं के आतंक से परेशान किसान

इसी बीच बाघ को ट्रेंक्युलाइज करने में वन विभाग को लगातार प्रयास करने के बाद भी सफलता नहीं मिल रही है, जिससे लोगों में रोष पनप रहा है। पीलीभीत के अमरिया विकास खंड क्षेत्र के हिमकनपुर, जगदीशपुर के खेतों मेें बाघ के पगचिन्हों के मिलने पर बाघ को ट्रेंक्युलाइज करने के लिए दो दिन से चार हाथियों से गन्ने के खेतों में कांबिंग चल रही है। अभी तक वन विभाग को कोई सफलता हासिल नहीं हुई है। बाघ को ट्रेंक्युलाइज करने के लिए लखनऊ और दिल्ली के डॉक्टर एक्सपर्ट भी लगे हुए हैं। क्षेत्र के खेतों में बाघ के होने के संकेत पगचिन्हों से मिल रहे हैं, जिससे गन्ने के एक खेत में जाल भी लगाया गया था। बाघ को पकडऩे के लिए वन  विभाग द्वारा चार पड्डे भी खेतो पर बांधे गए थे, लेकिन बाघ ने पड्डे की ओर रुख नहीं किया है।  कारण यह है गन्ने का रकबा अधिक होने से बाघ का आगे निकलने का अनुमान लगाया जा रहा है। बाघ का न पकड़े जाने से क्षेत्र मे खतरा बना हुआ है, जिससे लोग दहशत के कारण बाहर नहीं निकल रहे हैं। शाम होते ही घरों में कैद हो जाते हैं। हर समय बाघ का खतरा मंडराता रहता है। 

जानकारी के मुताबिक सिंहपुर में अधीर वाला पुत्र जगबंधु वाला की पशुशाला में दो तेंदुआ घुस आए और जब पशु के ऊपर झपट्टा मारा तो पशुशाला में बंधे तीन पशुओं में से 1 को घायल कर दिया तथा दो पशु रस्सी काटकर रोड के ऊपर दौडऩे लगे। जब गृहस्वामी को पता चला तो बाहर आकर देखा तो दो तेंदुआ में से एक तेंदुआ बछड़े को खा रहा था तथा दूसरा तेंदुआ दूसरे पशु के पीछे भाग रहा था। यह सब देख कर गृह स्वामी घर में घुस गया और वहीं से शोर शराबा शुरू कर दिया। पास में रह रहे ग्रामीणों ने जब आकर देखा सब लोग मिलकर शोर शराबा करने लगे तब जाकर तेंदुआ घर से जंगल की ओर भागे। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुआ के पगमार्ग की लोकेशन ली तथा घायल हुए जानवरों को तत्काल डॉक्टर को बुलाकर इलाज कराई। वन विभाग की टीम में वन दरोगा रामबहादुर तथा साथ में वाचर विश्वनाथ पहुंचे।

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