इलाहाबाद हाई कोर्ट का राज्य सरकार को आश्रय गृह घोटाले के आरोपों की जांच करने का निर्देश

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इलाहाबाद हाई कोर्ट का राज्य सरकार को आश्रय गृह घोटाले के आरोपों की जांच करने का निर्देश


🗒 रविवार, जून 02 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

उत्तर प्रदेश में सरकारी आश्रय गृह के निर्माण में घोटाले को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है। हाई कोर्ट ने सरकार से राज्य में आश्रय घरों के निर्माण में घोटाले के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका में कहा गया है कि सरकारी आश्रय गृह के निर्माण में बड़ा घोटाला हो रहा है। अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने बताया कि कल हाई कोर्ट में एक एक जनहित याचिका कल दायर की गई थी जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि राज्य भर में बनाए जा रहे आश्रय घरों ने अनुचित तरीके से अपने धन का उपयोग किया है। भले ही कोई विशेष उदाहरण सामने नहीं आया हो। याचिकाकर्ता ने कहा कि हम इस मामले को लेकर गंभीर हैं क्योंकि यह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है।उन्होंने आगे कहा कि अदालत ने जिला अधिकारियों को छह सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। हर जिले में एक आश्रय गृह निगरानी समिति है। उन्हें निर्धारित समय के भीतर उच्च न्यायालय के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस मामले की सुनवाई 15 जुलाई को होनी है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का राज्य सरकार को आश्रय गृह घोटाले के आरोपों की जांच करने का निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने देवरिया शेल्टर होम कांड में अभियुक्त संचालिका के पुत्र प्रदीप त्रिपाठी की जमानत सशर्त मंजूर कर ली है। वह 18 नवंबर 2018 से जेल में बंद हैं। यह आदेश राजवीर सिंह ने दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जमानत पर छूटने के बाद अपराध दोहराएंगे नहीं और न ही गवाहों पर दबाव डालेंगे व साक्ष्यों से छेड़छाड़ भी नहीं करेंगे। मुकदमे की तारीख पर कोर्ट में हाजिर होंगे। कोर्ट ने कहा कि शर्तों का पालन न करने पर अभियोजन पक्ष जमानत निरस्त करने की अर्जी दे सकता है।मालूम हो कि देवरिया शेल्टर होम की चार लड़कियों ने पुलिस थाने में आकर शेल्टर होम में लड़कियों के यौन शोषण की शिकायत की थी। पुलिस ने बाहर गई लड़कियों की बरामदगी की। हाईकोर्ट ने खबर पर जनहित याचिका कायम कर इस कांड में लिप्त लोगों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। सरकार ने जांच एसआइटी को सौंप दी है। कोर्ट ने चारों लड़कियों को अज्ञात स्थान पर रखा है। जांच के दौरान प्राइमरी टीचर याची का नाम आया। चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। याची का कहना है कि वह निर्दोष है और जमानत पर रिहा होने के बाद वह जमानत का दुरुपयोग नहीं करेगा। 

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