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चिन्मयानंद को संत समाज की ओर से बड़ी राहत अखाड़ा परिषद ने संघर्ष में साथ रहने का किया एलान


🗒 सोमवार, अक्टूबर 07 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

शाहजहांपुर में युवती के यौन शोषण और दुष्कर्म के आरोप में फंसे पूर्व गृहमंत्री स्वामी चिन्मयानंद को संत समाज की ओर से बड़ी राहत मिली है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने अचानक यू-टर्न लेते हुए एलान किया है कि संत समाज स्वामी चिन्मयानंद के साथ है। क्योंकि उन्हें युवती और उसके गिरोह ने एक बड़ी साजिश के तहत फंसाया है। पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े ने भी अपना रुख बदल दिया है। अखाड़े के महासचिव का कहना है कि स्वामी चिन्मयानंद का निष्कासन ही नहीं किया गया था। उन्हें केवल पंगत से बाहर रखने की बात हुई थी।स्वामी चिन्मयानंद के मामले में संत समाज के पहले और बाद के रुख में बदलाव दो वीडियो क्लिप को देखने से आया। पहले वायरल हुई वीडियो क्लिप में स्वामी चिन्मयानंद एक युवती से मसाज कराते हुए दिखे थे। उनके खिलाफ प्रदेश शासन ने एसआइटी जांच शुरू कराई, फिर साक्ष्यों के आधार पर चिन्मयानंद की गिरफ्तारी भी हुई। इस वीडियो को देखने के बाद संत समाज नाराज हो गया। यह तय हुआ था कि 10 अक्टूबर को हरिद्वार में होने वाली बैठक में इस बारे में कोई निर्णय लिया जाएगा। आसार थे कि संत समाज स्वामी चिन्मयानंद का बहिष्कार करेगा, लेकिन सोमवार को अचानक पूरी कहानी ही पलट गई।अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा है कि स्वामी चिन्मयानंद को साजिश के तहत फंसाया गया है। जिस युवती के यौन शोषण की बात सामने आई थी उस लड़की और उसके गिरोह में शामिल युवकों के एक गाड़ी में बैठकर चिन्मयानंद से धन ऐंठने की चर्चा का वीडियो भी देखा गया। इससे साबित होता है कि चिन्मयानंद को इस गिरोह ने फंसाया है। ऐसे में संत समाज अब चिन्मयानंद के संघर्ष में उनके साथ खड़ा रहेगा। इतना ही नहीं, 10 अक्टूबर को प्रस्तावित बैठक में अब इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं की जाएगी।वहीं दारागंज के पंचायती महानिर्वाण अखाड़ा के महासचिव महंत रामसेवक गिरि ने कहा कि उन्होंने चिन्मयानंद के मामले में सितंबर में कहा था कि उन्हें हम लोगों की पंगत में बैठने का अधिकार नहीं है। लेकिन, सोमवार को अखाड़े ने क्या फैसला लिया, इस बारे में अब वे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद के कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा ने 24 अगस्त को वीडियो वायरल कर उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान में लिया। कोर्ट के आदेश पर एसआइटी पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। छात्रा के पिता की ओर से स्वामी चिन्मयानंद पर अपहरण का मुकदमा, जबकि स्वामी के अधिवक्ता की ओर से छात्रा, उसके दोस्त संजय, विक्रम व सचिन पर चिन्मयानंद से पांच करोड़ की रंगदारी मांगने का आरोप है। दोनों मामलों की जांच एसआइटी पांचों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इसी बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने चिन्मयानंद को संत समाज से निष्कासित करने का फैसला किया था। परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा था कि चिन्मयानंद के कृत्य से संत समाज अपमानित हुआ है। यह कृत्य निंदनीय ही नहीं, अक्षम्य भी है।

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