इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रश्नों के गलत जवाब पर यूपी सरकार से मांगी जानकारी

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रश्नों के गलत जवाब पर यूपी सरकार से मांगी जानकारी


🗒 शुक्रवार, मई 22 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रश्नों के गलत जवाब पर यूपी सरकार से मांगी जानकारी

उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में 69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट घोषित होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की शरण ली है। वे उत्तरकुंजी में कई प्रश्नों का गलत जवाब होने व कई प्रश्नों के कोर्स से बाहर का होने जैसी विसंगतियां बता रहे हैं। इसके मद्देनजर दर्जनों वकीलों ने अर्जेंसी अर्जी देकर याचिका दायर करने और तत्काल सुनवाई की मांग की है। ऐसे ही रोहित शुक्ल व 110 अभ्यर्थियों की एक अर्जी को स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक वर्मा ने राज्य सरकार से जानकारी मांगी है। याचिका पर सुनवाई 28 मई को होगी।इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तमाम अधिवक्ताओं की अर्जियों को सुनवाई से इनकार करते हुए निरस्त कर दिया गया है। महानिबंधक कार्यालय इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा है कि एक ही मामले में दोहरा मापदंड क्यों अपनाया गया है? लखनऊ पीठ ने भी ऋषभ मिश्र व अन्य की याचिका पर सरकार से जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। याचिका 28 मई को सुनवाई के लिए पेश करने का आदेश दिया है।वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा, केपी शुक्ल, संतोष कुमार त्रिपाठी, ऋतेश श्रीवास्तव, सीमांत सिंह सहित कई अधिवक्ताओं ने महानिबंधका कार्यालय के इस रवैये पर नाराजगी जाहिर की है। कहा कि यह न्यायिक मानदंडों व न्यायिक एकरूपता के सिद्धांतों के खिलाफ है। अधिवक्ताओं को याचिका दाखिल न कर पाने के कारण वादकारियों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है।वरिष्ठ अधिवक्ता बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आरके ओझा ने अर्जेंसी अर्जी खारिज होने के बाद दोबारा अर्जी दाखिल की है। उन्हें महानिबंधक कार्यालय से बताया गया कि बुधवार को याचिका कोर्ट में पेश होगी। लेकिन, अभी तक इसकी सूचना वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है। इससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आरके ओझा का कहना है कि एक जैसे मामलों की एक साथ सुनवाई की जानी चाहिए। एक को सुनने और अन्य सैकड़ों की अर्जी खारिज करने से न्यायिक व्यवस्था के प्रति जनता में निराशा फैलेगी।

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