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थ्री लेयर की कड़ी सुरक्षा से परेशान बूलगढ़ी गांव का पीड़ित परिवार, मामला पहुंचा हाई कोर्ट


🗒 गुरुवार, अक्टूबर 08 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
थ्री लेयर की कड़ी सुरक्षा से परेशान बूलगढ़ी गांव का पीड़ित परिवार, मामला पहुंचा हाई कोर्ट

प्रयागराज,हाथरस के बूलगढ़ी गांव में पीड़ित परिवार अब थ्री लेयर सुरक्षा से परेशान है। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने परिवार की सुरक्षा काफी मुस्तैद कर दी है। घर पर सीसीटीवी कैमरा लगाने के साथ ही पीड़ित परिवार के हर सदस्य की सुरक्षा में दो-दो पुलिसकर्मी तैनात हैं। इसके साथ ही घर के बाहर पीएसी का पहरा भी है। इतनी सुरक्षा परेशानी का सबब बनने पर पीड़ित परिवार राहत के लिए हाई कोर्ट पहुंचा है।इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाथरस के बूलगढ़ी कांड में मृत युवती के स्वजन की ओर दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी। याचिका में कहा गया था कि परिवार के लोगों को प्रशासन ने कैद कर रखा है और उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट सुनवाई कर रही है। कोर्ट के आदेश पर ही याचियों को सुरक्षा दी गई है। ऐसे में हस्तक्षेप का औचित्य नहीं है।यह आदेश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर तथा न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने पीडि़ता के पिता व छह अन्य की याचिका पर दिया है। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सोनीपत (हरियाणा) के अखिल भारतीय वाल्मीकि महापंचायत के राष्ट्रीय महासचिव सुरेन्द्र कुमार ने दाखिल की है। वाट्सएप संदेश के जरिये पीड़िता के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट के महमूद प्राचा व अन्य को वकील बनाया है।अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति की और कहा कि सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका विचाराधीन है। कोर्ट के आदेश पर पीड़िता के परिवार व गवाहों को सुरक्षा दी गई है। परिवार ने किसी को भी वकालतनामे देकर याचिका दाखिल करने के लिए अधिकृत नहीं किया है। मैसेज फारवर्ड मेसेज है। किसे कौन नियुक्त करना चाहता है, साफ नहीं है। परिवार को पर्सनल गार्ड दिए गए हैं। घर पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं ताकि कोई असामाजिक तत्व घर में न घुस सके।याचियों ने प्रशासन से कभी नहीं कहा कि वे बाहर जाना चाहते हैं। किसी को रोका नहीं गया है। वे स्वतंत्र हैं। फ्री होकर दिल्ली जाने की छूट दी गई तो सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के आदेश निरर्थक हो जाएंगे। परिवार वालों को पता ही नहीं है कि संस्थाएं व राजनीतिक दल उनका इस्तेमाल कर रहे हैं। याचियों के वकीलों का कहना था कि परिवार के लोगों का सेल फोन छीन लिया गया है। किसी से बात नही करने दे रहे हैं। हाथरस जिले को ब्लाक कर दिया गया है। लोगों को पीडि़तों से मिलने नही दिया जा रहा है। कोर्ट ने वकीलों से जानना चाहा कि याची क्या सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर जवाब दाखिल करने जाना चाहते हैं तो कोई जवाब नही मिला। इस पर कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी।हाथरस के पीड़िता परिवार को यूपी सरकार ने थ्री लेयर सुरक्षा दी है। अब इसी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर परिवार परेशान हो गया है। पीड़िता के परिवार की ओर से एक सामाजिक कार्यकर्ता ने हाई कोर्ट में अर्जी देकर राहत दिलाने की मांग की है। इस अर्जी में कहा गया है कि अत्यधिक सुरक्षा और पुलिस-प्रशासन की बंदिशों की वजह से परिवार घर में कैद होकर रह गया है। अर्जी में परिवार को लोगों से मिलने-जुलने और अपनी बात खुलकर कह सकने की छूट देने की मांग की है।कोर्ट के आदेश पर योगी आदित्यनाथ सरकार ने पीड़िता के परिवार की सुरक्षा का पुख्ता बंदोबस्त किया है। हाथरस में पीडि़ता के घर पर बुधवार को ही मेटल डिटेक्टर और सीसी कैमरे लगाए गए। वहां चौबीसों घंटे पुलिस की तैनाती की गई है। परिवार के हर सदस्य की सुरक्षा में दो-दो पुलिसकर्मी तैनात हैं।मेटल डिटेक्टर घर के एंट्री प्वॉइंट पर लगाया गया है जहां हर आने-जाने वाले का नाम और पता दर्ज किया जा रहा है। घर के बाहर कई स्थानों पर सीसी कैमरे भी लगाए गए हैं। व्यवस्था के तहत कहीं पर भी जाने से पहले पीड़िता के परिवार को सुरक्षाकर्मी को जानकारी देना जरूरी है। परिवार की सुरक्षा के अलावा गांव में तनाव को देखते हुए बड़ी संख्या में अतिरिक्त फोर्स की तैनाती भी की गई है।हाथरस के एसडीएम ने कहा कि यह सारी व्यवस्था परिवार की सहमति से की गई है लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र कुमार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा है कि वहां पर पुलिस -प्रशासन की बंदिशों के चलते पीड़ित परिवार घर में कैद सा होकर रह गया है। बंदिशों के चलते तमाम लोग मिलने नहीं आ पा रहे हैं। परिवार किसी से खुलकर अपनी बात नहीं कह पा रहा है। सरकारी अमला घर से बाहर नहीं निकलने दे रहा है।अर्जी में कहा गया कि इंसाफ पाने के लिए पीड़ित परिवार से बंदिशें हटना जरूरी है। सुरेंद्र कुमार ने दावा किया कि उन्होंने पीड़ित परिवार की तरफ से अर्जी दाखिल की है। उन्हेंं फोन कर पीड़ित परिवार ने उनकी तरफ से अर्जी दाखिल करने और कोर्ट से दखल देने की मांग करने की की है। उन्होंने इस मामले की सुनवाई शीघ्र करने की मांग की।  हाथरस कांड को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने याचिका में उठाए गए मुद्दों पर राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। याचिका अधिवक्ता मंजूषा भारतीय ने दाखिल की है। मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति एमएन भंडारी व न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की पीठ ने याचिका 19 अक्टूबर को पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका में घटना की सीबीआइ जांच कराने, पीडि़त परिवार को मुआवजा और सुरक्षा देने की मांग की गई है। वहीं, प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि याचिका में उठाए गए अधिकतर मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो चुकी है। वहां प्रदेश सरकार अपना जवाब दाखिल कर चुकी है। मामले की सुनवाई सर्वोच्च अदालत में चल रही है इसलिए याचिका खारिज की जाए। लेकिन, कोर्ट ने इस मांग को नहीं माना।

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