यूनाइट फॉर ह्यूमैनिटी हिंदी समाचार पत्र

RNI - UPHIN/2013/55191 (साप्ताहिक)
RNI - UPHIN/2014/57987 (दैनिक)
RNI - UPBIL/2015/65021 (मासिक)

खेतो में जलाई जा रही पराली नही खुली विभाग की नींद


🗒 शुक्रवार, नवंबर 27 2020
🖋 रजत तिवारी, बुंदेलखंड सह संपादक बुंदेलखंड
खेतो में जलाई जा रही पराली नही खुली विभाग की नींद

 

रायबरेली/साड़बरा-डलमऊ बढ़ रहे प्रदूषण के चलते खेत में पराली जलाने पर रोक लगाई गई है। साथ ही पराली जलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई है। इसको लेकर जिला प्रशासन स्तर से लगातार किसानों को जागरूक करने का काम भी किया जा रहा है। लेकिन डलमऊ तहसील क्षेत्र में अभी भी किसान इस पर अमल नहीं कर रहे हैं। प्रत्येक दिन किसी न किसी गांव में शाम के समय वातावरण में धुआं दिखाई देने लगता है खेतों के बगल से होकर गुजरने वाला प्रशासन खेत में पराली जलता देखकर भी बेखबर बना हुआ है। पराली जलाने से उठने वाले धुएं से प्रदूषण फैल रहा है सरकार के सख्त आदेश के बाद धडल्ले से जलाई जा रही है पराली खुले आम जलाई जा रही है डलमऊ तहसील क्षेत्र के साड़बरा ग्राम सभा मे किसानों द्वारा पराली जलाई गई सच यह भी है कि तमाम जागरूकता के बावजूद किसानों के पराली जलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है तो प्रदूषण विभाग की ओर से सिवाय जागरूकता के अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यह स्थिति तब है जब प्रदेश से प्रतिदिन पराली जलाने के मामलों को लेकर रिपोर्ट तलब की जा रही है। गौरतलब है कि पराली जलाने के बाद धुंए से कई जहरीली गैस उत्सर्जित होती हैं वही जब इस मामले को लेकर डलमऊ उपजिलाधिकारी सविता यादव से बात करना चाहा तो किसी और ने फ़ोन उठा कर कट कर दिया।
लक्ष्मीकान्त शर्मा ब्यूरो चीफ रायबरेली