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सीतापुर में बाढ़ के पानी में डूबकर मासूम की मौत, अधेड़ लापता


🗒 सोमवार, अगस्त 03 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
सीतापुर में बाढ़ के पानी में डूबकर मासूम की मौत, अधेड़ लापता

शारदा व घाघरा नदियों के जलस्तर में दो दिन से कमी तो आई है, लेकिन रेउसा, तंबौर व रामपुर मथुरा क्षेत्र के चार दर्जन गांव में पानी अभी भी भरा है। संपर्क मार्ग भी डूबे हुए हैं, जिससे लोगों की दिक्कतें कम नहीं हुई हैं। वहीं सोमवार को थानगांव क्षेत्र में बाढ़ के पानी में डूबकर एक बच्चे की मौत हो गई। वहीं अधेड़ लापता है। सीतापुर के थानगांव थाना क्षेत्र में सोमवार को बाढ़ के पानी में डूबकर मासूम की मौत हो गई। वहीं एक दूसरी घटना में जानवर चरा कर घर लौट रहा अधेड़ नाले में डूब गया। थानगांव क्षेत्र के हुसैनपुर खानी निवासी ज्ञान चंद्र का तीन वर्षीय पुत्र विकास घर के सामने खेल रहा था। ज्ञान चंद्र खेत गए थे और पत्नी खाना बना रही थी।  काफी देर तक विकास नजर नहीं आया तो ज्ञान चंद्र की पत्नी ने तलाश शुरू की।  कुछ देर बाद विकास का शव घर के सामने खेत में भरे बाढ़ के पानी में उतराता मिला। शव देखकर परिवार में कोहराम मच गया।  वहीं क्षेत्र के झिसनी निवासी मूल चंद्र पुत्र साधू राम सोमवार की शाम जानवर चरा कर घर लौट रहा था। गांव से कुछ दूर पहले बाढ़ के पानी से भरे नाले में पैर फिसल जाने से डूब गया।  सूचना पर पहुंची पुलिस ने गोताखोरों के माध्यम से तलाश शुरू की, लेकिन देर शाम तक उसका शव बरामद नहीं हुआ था। थानाध्यक्ष संजीव कुशवाहा ने बताया मूलचंद की तलाश में गोताखोर लगे हैं। अभी तक सफलता नहीं मिली है, प्रयास जारी है।सीतापुर में राजस्व कर्मियों ने सोमवार को गोलोक कोडर, जट पुरवा, म्योढी छोलहा  आदि बाढ़ प्रभावित गांवों में भोजन के पैकेट वितरित किए। रेउसा, बेहटा व रामपुर मथुरा इलाके के बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग छतों पर और ऊंचे स्थानों पर पनाह लिए हैं। गांवों में घाघरा नदी का पानी भरा है। रेउसा ब्लॉक के 25 से अधिक गांव बाढ़ प्रभावित हैं। बेहटा इलाके के गांवों में भी नदी ने जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। नदियों का पानी घरों में भरा है। गांवों को आने वाले रास्ते जलमग्न हैं। आवागमन ठप होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रामपुर मथुरा इलाके के बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीण घर छोड़कर तटबंध की ओर पलायन कर रहे है। बाढ़ प्रभावित लोग अपनी गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थानों पर ले कर जा रहे हैं।  शारदा और घाघरा नदी का पानी खेतों में भी भरा है जिससे धान की फसल डूबी हुई है।गोलोक कोडर के लेखपाल सदानंद वर्मा ने बताया सोमवार को बाढ़ प्रभावित गांवों में 2600 लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ का पानी घट रहा है, शीघ्र ही गांव से पानी निकल जाएगा। बराबर नजर रखी जा रही है।

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