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आइएनएस ने सरकार से की न्यूजप्रिंट पर सीमाशुल्क वृद्धि वापस लेने की मांग


🗒 शुक्रवार, जुलाई 26 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी की कार्यकारी समिति ने अपनी आपात बैठक में सरकार से समाचार पत्रों के लिए इस्तेमाल होने वाले न्यूजप्रिंट, अनकोटेड पेपर तथा पत्रिकाओं में इस्तेमाल होने वाले लाइट वेट पेपर पर लगाए गए 10 फीसद सीमा शुल्क को वापस लेने की मांग की है।इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (आइएनएस) के मुताबिक भारत में न्यूजप्रिंट की कुल खपत 25 लाख टन की है। जबकि स्वदेशी मिलों का कुल उत्पादन केवल 10 लाख टन का है। ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय न्यूजप्रिंट निर्माताओं ने सरकार को गलत भरोसा दिया है कि वे संपूर्ण आवश्यकता की पूर्ति कर सकते हैं।पिछले वर्ष दुनिया भर में न्यूजपिं्रट की भारी किल्लत थी। इसके बावजूद भारतीय निर्माता केवल 12,726 टन न्यूजप्रिंट का ही निर्यात कर सके थे। इससे पता चलता है कि भारत में उत्पादन क्षमता सीमित है और स्वदेशी निर्माताओं ने सरकार को गलत जानकारी दी है।इतना ही नहीं, स्वदेशी न्यूजप्रिंट आयातित न्यूजप्रिंट के मुकाबले गुणवत्ता में भी कमतर है, जिससे आधुनिक छापाखानों में इसका सीमित इस्तेमाल हो पाता है। छपाई के दौरान आयातित न्यूजप्रिंट के मुकाबले स्वदेशी न्यूजप्रिंट के फटने की दर तीन गुना से भी ज्यादा है। इससे बर्बादी के अलावा उत्पादकता में कमी आती है।स्वदेशी मिलों से न्यूजप्रिंट की आपूर्ति में भी अनिश्चितता रहती है। क्योंकि अनेक मिले केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड की ओर से कारण बताओ नोटिस का सामना कर रही हैं। जहां तक अनकोटेड तथा लाइटवेट कोटेड पेपर का मामला है तो इनकी देश में कोई उत्पादन क्षमता ही नहीं है।कम विज्ञापन आय, ऊंची लागतों तथा डिजिटल के बढ़ते चलन के कारण समाचारपत्रों एवं पत्रिकाओं के छोटे और मझोले प्रकाशक पहले ही भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रहे हैं। सरकार के ताजा कदम से उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा। ये भी संभव है कि उन्हें अपना कारोबार बंद करना पड़े। इसलिए सरकार को दखल देकर सीमाशुल्क बढ़ोतरी के इस कदम को वापस लेना चाहिए तथा समाचार पत्र उद्योग को असहनीय बोझ से बचा लेना चाहिए।

आइएनएस ने सरकार से की न्यूजप्रिंट पर सीमाशुल्क वृद्धि वापस लेने की मांग

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