यूनाइट फॉर ह्यूमैनिटी हिंदी समाचार पत्र

RNI - UPHIN/2013/55191 (साप्ताहिक)
RNI - UPHIN/2014/57987 (दैनिक)
RNI - UPBIL/2015/65021 (मासिक)

कबिता-हमारे मन की अभिलाषा हो,


🗒 रविवार, फरवरी 02 2020
🖋 रजत तिवारी, बुंदेलखंड सह संपादक बुंदेलखंड

हमारे मन की अभिलाषा है,
जीवन हमारा पुष्प सा हो।।
जीवन पथ की राहों में
हम नव नित आगे बढ़ें।।
सारे संकटो से निकल,
फूल सा जीवन खिलाये
विचार हृदय के झोले में,
पुष्प सा मन अपना बनाये।।
विकट परिस्थियों से निकल,
गुलाब सा खिल जाए हम।।
मन की कलियों से सवर,
मन  पुष्प का निर्माण करे।।
सद्भावना, समरसता का,
हृदय में नव पुष्प खिलाये।।
भारत मा के श्री चरणों में,
अर्पण ये नव विचार करू।।
नित समद्ध हो भारत मां,
मन की यह अभिलाषा है।।

कबिता-हमारे मन की अभिलाषा हो,

              वत्सले सदा मातृभूमे नमः।।
                     पी एन त्रिपाठी

 
 
 
 
 
 

विशेष से अन्य समाचार व लेख

» पहली बार ऑनलाइन जारी करेगा परीक्षा की ओएमआर शीट

» कविता-मन तू क्यों कलुषित होता है,

» सरदार पतविंदर सिंह प्रकाश की किरण- भोगल

» एक अप्रैल से अडानी ग्रुप के हवाले होगा लखनऊ का अमौसी एयरपोर्ट

» अब परीक्षार्थी 'ट्वीट' कर भी दर्ज करवा सकेंगे शिकायत, त्वरित होगा निस्तारण