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एक अप्रैल से अडानी ग्रुप के हवाले होगा लखनऊ का अमौसी एयरपोर्ट


🗒 गुरुवार, फरवरी 13 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर यात्री सुविधाओं का जिम्मा एक अप्रैल से अडानी ग्रुप के हाथ होगा। पिछले साल फरवरी में केंद्र सरकार ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के बाद अडानी ग्रुप को लीज पर लखनऊ एयरपोर्ट देने का लेटर ऑफ इंडेंट जारी किया था। इसी क्रम में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने अब अडानी ग्रुप को एयरपोर्ट सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक अप्रैल से एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास सिर्फ विमानों के ऑपरेशन के लिए एटीसी और नेवीगेशन की जिम्मेदारी रहेगी।चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के विकास और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह फैसला हुआ है। इसके तहत लखनऊ एयरपोर्ट के वर्तमान घरेलू व इंटरनेशनल टर्मिनल की यात्री सुविधाएं अडानी ग्रुप बेहतर करेगा। कार्गो से लेकर रनवे के विकास और एयरलाइंस से जुड़ी कॉमर्शियल एक्टिविटी ग्रुप के पास होंगी। एयरपोर्ट पर ट्रैफिक बढ़ाने के लिए भी निवेश होगा। इसके तहत एयरपोर्ट के बाहरी हिस्से से लेकर कानपुर रोड तक नये सिरे से पार्क व सड़क का निर्माण भी कराया जाएगा।भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के 300 कर्मचारी लखनऊ एयरपोर्ट पर तैनात हैं। इसमें ऑपरेशन के अधिकांश कर्मचारी एटीसी व नेवीगेशन में लगे रहेंगे, जबकि कॉमर्शियल के कर्मचारी दो साल अडानी ग्रुप के साथ काम करेंगे। फिर उन्हें दूसरी जगह तैनात किया जाएगालखनऊ एयरपोर्ट वर्तमान में सालाना करीब 100 करोड़ रुपये की आय भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को देता है। वर्ष 2018 में लखनऊ एयरपोर्ट ने 118 करोड़ और 2019 में 95 करोड़ रुपये का राजस्व दिया था।अभी लखनऊ एयरपोर्ट के रनवे की लंबाई 2742 मीटर है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत बोइंग जैसे बड़े विमानों की लैंडिंग के लिए यह लंबाई 3500 मीटर होनी चाहिए। कानपुर रोड की ओर 800 मीटर रनवे के विस्तार का प्रस्ताव लंबित है। माना जा रहा है कि अब इस रनवे के विस्तार की अड़चन दूर हो जाएगी।केंद्र सरकार ने लखनऊ एयरपोर्ट पर टर्मिनल तीन को बनाने के लिए 1380 करोड़ रुपये की मंजूरी पिछले साल दी थी। इस पर अब काम शुरू हो गया है। यह एकीकृत टर्मिनल 36 महीने में तैयार होगा। कोलकाता एयरपोर्ट की तरह प्रथम तल पर प्रस्थान के लिए ओवरब्रिज से वाहन गेट तक आएंगे, जबकि आगमन भूतल पर होगा। अडानी ग्रुप ने टर्मिनल तीन को बनाने की डिजाइन में बदलाव भी किया है।उद्योगपतियों और सरकार के इस्तेमाल के लिए लखनऊ एयरपोर्ट 1986 में बनाया गया था। यात्रियों की बढ़ती संख्या के बाद इस एयरपोर्ट को 17 जुलाई 2008 में अपग्रेड करने का निर्णय हुआ। मई 2012 में लखनऊ एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय दर्जा दिया गया। दो जून 2012 से नया थ्री टियर का करीब दो हजार यात्रियों की क्षमता वाला घरेलू टर्मिनल भी शुरू हो गया।

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