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मॉडल-फोटोग्राफर अधिराज अब चीन क्यों नहीं जाना चाहते


🗒 सोमवार, अप्रैल 20 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
अपने 13 साल के मॉडलिंग करियर के दौरान मुझे विभिन्न जगहों की यात्रा करने का अवसर मिला। उन में से एक देश जिससे मुझे पहली नज़र में प्यार हो गया - वह था चीन। मेरा हर बार चीन जाना बहुत सुखद अनुभव रहा! ...  शंघाई, बीजिंग, ग्वांगजू, शियामेन, निंगबो, चेंगडु से लेकर जांगजिआजिए (जो हुनान प्रान्त में स्थित है), जहा हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर फिल्म अवतार की शूटिंग हुई थी। लेकिन, चीन की कुछ भयावह सच्चाइयों के बारे में मुझे बाद में पता चला। मुझे आज भी याद है जब मेरी पहली चीन यात्रा के लिए मैने मुंबई से शंघाई की फ्लाइट ली थी। मेरी एजेंसी की मैनेजर जेन* मुझे एयरपोर्ट से लेने आयी थी। वह मेरे लिए एक उपहार लेकर आयी थी। और क्या उपहार था वह - उसके अंदर अनेक तरह की चीजें थीं जैसे चिकन के पैर, बत्तक की चर्बी की कैंडी, कुछ सूखे ऑक्टोपस और कई और चीज़े जो मैंने अपनी जीवन में कभी नहीं  देखी  थी। मेरी यात्रा वहाँ काफी आरामदायक थी और ज्यादातर लोग जो मुझे मिले बहुत अच्छे, विनम्र और मेहनती थे। मैं शंघाई की विशाल इमारतों से हैरान था, शाम होते ही पूरा शहर जैसे जगमगा उठता था। यह सब मेरे लिए बिलकुल नया अनुभव था। मेरे शुरुआती दिनों की एक घटना मुझे आज भी याद है। मेरा दोस्त स्टीव* जो मियामी से था उसने जेन से फालुन गोंग (एक शांतिपूर्ण आध्यात्मिक अभ्यास जिस पर  चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने पाबंदी लगाई हुई है) के अभ्यास करने वाले लोगो पर हो रहे अत्याचारों के बारे में पूछा, जेन उस सवाल से बहुत डर गयी और बार बार दोहरानी लगी कि उसे इसके बारे में कुछ नहीं पता, और वह इस बारे में बात नहीं करना चाहती। मैंने उस वक्त इन बातों पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया पर जेन की आकस्मिक चिंता मुझे अजीब लगी, जैसे उस पर नज़र रखी जा रही हो।  
इस घटना को 11 साल हो गए। उस पहली यात्रा के बाद मैं चीन कई बार गया था, लेकिन अब मैं समझ सका हूँ कि जेन अपनी राय बताने से इतना क्यों डर गयी थी।  
चीन की एक यात्रा से भारत लौटने के बाद मेरा फालुन गोंग अभ्यास से परिचय हुआ। इसके 6 साल के अभ्यास के बाद मेरे विचार में फालुन गोंग से मुझे स्वास्थ्य और आध्यात्मिक स्टार पर बहुत लाभ हुआ, ऐसा कुछ जिससे मेरा जीवन बदल गया!
कोविड -19 महामारी के हालिया प्रकोप में पूरी दुनिया इस बात की गवाह बन गयी कि कैसे चीन के नागरिक, पत्रकार, डॉक्टर, छात्र और बहुत से लोग बिना नामों- निशान के लापता हो गए! हालाँकि, यह चीन में कुछ नया नहीं है! वहा लोगो के रहस्यमय ढंग से गायब होने के कई मामले सामने आए हैं। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) मतभेद की किसी भी आवाज को मिटा देने का साहस रखती है।
यह बिना कारण नहीं है कि वुहान दुष्ट सीसीपी वायरस के फैलाव का केंद्र बिंदु रहा है; यह 1999 में शुरू हुआ जब जियांग जेमिन ने फालुन गोंग के घोर दमन की शुरुआत की थी। वुहान में स्थित ऑर्गन ट्रांसप्लांट रिसर्च संस्थान राज्य द्वारा अधिकृत जबरन अंग प्रत्यारोपण  के केंद्र  के रूप में बदनाम रहा है जिसके शिकार अधिकतर फालुन गोंग अभ्यासी, तिब्बती, मुस्लिम वीगर, और अन्य अल्पसंख्यक रहे।
चीनी लोगों के प्रति मेरा प्यार कम नहीं हुआ है लेकिन मैं अब चीन वापस जाने के लिए सुरक्षित महसूस नहीं करता हूं। अपनी शुरुआती यात्राओं के दौरान मेरे लिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स और ईमेल्स का इस्तेमाल करना संभव था, लेकिन जब तक मैंने अपनी अंतिम यात्रा की, तब तक इंटरनेट का  से जुड़ना बहुत मुश्किल हो गया। इन सबके अलावा वहाँ का वातावरण भी बहुत रुखा और द्वेषपूर्ण लगने लगा। मेरे अंत के दिनों में, मैं उस शहर से वैसा नहीं जुड़ सका जैसा मैंने पहले महसूस किया था। मैं अभी भी बीजिंग में अपने पहले दिनों के बारे में सोचता हूं ... और मेरे सभी दोस्तो के बारे में जो मैंने अपने यात्राओं दौरान बनाए थे ...
“पतझड़ में पुष्प खिले, सुंदर क्षण भर से 
दूर इंतज़ार में हैं साथी सारे, मद्धम लालटेन के नीचे 
साथ बिताये उन पलों की याद लिए 
दृढ़ता और साहस के साथ... 
हम फिर मिलेंगे, अपने पश्चिम की ओर सफर के मुकाम पर!”
यह वास्तव में मेरा सौभाग्य है कि मैं ऐसे देश में पैदा हुआ जहाँ मेरे आस्था के अधिकार सुरक्षित हैं।  जहां मुझे अपने आप को व्यक्त करने का अधिकार है और निरंतर भय में नहीं रहना पड़ता कि सच बोलने से मेरा जीवन समाप्त हो सकता है या मैं रहस्यमय तरीके से लापता हो कर किसी यंत्रणा शिविर में पहुँच सकता हूं ... जहां मेरे रक्त के नमूने जबरदस्ती लिए जाएंगे ... उन हृदयहीन दानवों के हाथों में जो मेरे अंगों को बाहर निकाल लेंगे। फिर भी, मेरे अन्दर एक तीव्र इच्छा ही, इस बात का गहरा खेद है कि मैं एक स्वतंत्र नागरिक होने से पहले  ..
“मैं इस दुनिया का एक अस्थायी निवासी हूं, सीमाएं बहुत सी हैं किन्तु अदृश्य हैं ... केवल एक चीज जो दिखाई दे रही है वह है संवेदनशील प्राणियों के बंधन ... जो आस्था और विश्वास से ज़िंदा हैं!” 
यदि दुनिया के राष्ट्र चीनी कम्युनिस्ट पार्टी नामक इस दुष्ट शासन के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं करते हैं, तो शायद अगली महामारी हमें वापस आने का मौका न दे। चीन यात्रा के अपने निजी अनुभवों से, मैं अच्छे और दयालु लोगों से मिला था। चीन में वर्तमान स्थिति को देखते हुए मैं अक्सर जेन और उसके जैसे कई अन्य लोगों के बारे में सोचता हूं ... और आशा करता हूँ किसी दिन मेरे लिए, हमारे लिए और उनके लिए एक बेहतर दुनिया होगी … #worldpeace … #freetobelieve … #freetomeditate !!! 
 (पहचान छिपाने के लिए काल्पनिक नामों का प्रयोग किया गया है)
 
-अधिराज चक्रवर्ती

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