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बिहार के एक मजदूर का ऐसा दर्द उनकी आंखों से भी आंसू निकल पड़े।


🗒 शनिवार, मई 16 2020
🖋 रजत तिवारी, बुंदेलखंड सह संपादक बुंदेलखंड
बिहार के एक मजदूर का ऐसा दर्द उनकी आंखों से भी आंसू निकल पड़े।

बिहार के एक मजदूर का ऐसा दर्द जब प्रशासन के अधिकारियों ने सुना तो उनकी आंखों से भी आंसू निकल पड़े। पूर्वी जिले के जिलाधिकारी अरुण कुमार मिश्रा को जब मजदूर की स्थिति का पता चला तो उन्होंने तुरंत उसकी स्क्रीनिंग करवाई और बुधवार को नई दिल्ली से बिहार जाने वाले विशेष ट्रेन में मजदूर के लिए सीट का इंतजाम किया। एसडीएम संदीप दत्ता ने मजदूर को स्टेशन तक पहुंंचाया और उनके लिए खाने पीने की व्यवस्था की।‘साहब मेरे पास न तो बड़ी गाड़ी है न ही साइकिल… मेरे आठ माह के फूल जैसे बच्चे ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है। वो बच्चा जिसके लिए मैंने बिहार के बड़े से बड़े मंदिर में जा-जाकर माथा टेका, आठ वर्ष तक भगवान से प्रार्थना की तब जाकर मुझे एक बेटा नसीब हुआ। उसकी मौत हुए तीन दिन हो चुके हैं, मेरे पास दौलत नहीं है जो आपकों दे दूं और आप मुझे बिहार पहुंचा दो। मैं एक बदनसीब पिता हूं, जो आखिरी वक्त में अपने बच्चें के चेहरे को भी नहीं देख सका। मुझे पैदल ही बिहार जाने दो, ताकि मैं इस मुश्किल वक्त में अपनी पत्नी से कह सकूं घबरा नहीं एक सच्चे साथी की तरह मैं तेरे साथ खड़ा हूं।’