कविता-भारत माँ के कृषक पुत्र हम................

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कविता-भारत माँ के कृषक पुत्र हम................


🗒 शुक्रवार, अगस्त 28 2020
🖋 रजत तिवारी, बुंदेलखंड सह संपादक बुंदेलखंड
कविता-भारत माँ  के कृषक पुत्र हम................

भारत माँ  के कृषक पुत्र हम
राष्ट्र शक्ति के परिचायक हैं
निज कंधों की मेहनत से हम
निज राष्ट्र का गौरव बुनते है
भारत माँ के कृषक पुत्र हम
तन मन राष्ट्र समर्पित होते है।।

लोग सुखी हो राष्ट्र सुखी हो
माँ धरती पर मेहनत करते है
बड़ा हृदय है हम कृषको का
संकट को सीने से लेते है
भारत माँ के कृषक पुत्र हम
तन मन राष्ट्र समर्पित होते है।।

पड़ती मार है प्रकृति माँ की
सपनो की  बलि जब चढ़ती है
उम्मीदों पर जब पानी फिरता
हम कृषको की मेहनत पर।।

सब कुछ सहते आगे बढते
राष्ट्र सुखी हो यह प्रण लेते
निज कंधों की मेहनत से फिर
उम्मीदों की नव ज्योति जगाते है
कृषक पुत्र हम भारत माँ के
तन मन राष्ट्र समर्पित होते है।।

सहनशीलता के सागर हम
महाशक्ति के अग्रदूत  हम
संकट समय में रक्षक  हम
क्षुधा पूर्ति के नायक  हम
राष्ट्र शक्ति के परिचायक हम
भारत माँ के कृषक पुत्र हम
तन मन राष्ट्र समर्पित होते है ।।

           पी एन त्रिपाठी
       युवा लेखक/ रचनाकार
                चित्रकूट

प्रताप नारायण त्रिपाठी

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