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विश्व जल दिवस पर विशेष


🗒 सोमवार, मार्च 22 2021
🖋 रजत तिवारी, बुंदेलखंड सह संपादक बुंदेलखंड
विश्व जल दिवस पर विशेष


जल है तो कल है......
महोबा। पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक जीव जन्तुओ तथा मानव के लिए जल की उपयोगिता को तो हम भली भांति जानते है। बिना जल के न तो इंसान जीवित रह सकता है न ही जीव-जन्तु इन सबको जानते हुये भी हम जल को बचाने की अपेक्षा जल के कारको को नष्ट करने में लगे हुये है। यही कारण है कि आज से कई वर्षो पूर्व और वर्तमान मे बारिश की मात्रा मे जमीन आसमान का अन्तर आया है। हमारी पृथ्वी पर तीन चैथाई पानी है जिसमे से कुछ ही प्रतिशत पानी को पीने के लिए प्रयोग किया जाता है। पानी की अहमियत देखने के बाद भी हम पानी को महत्व नहीं दे रहे है। जल की लगातार बर्बादी आगामी समय को भयावह रूप में परिवर्तित करने में दूर नहीं है। आलम यह है कि वर्षा ऋतु में पानी की आस लगाये किसान खेती के लिए भी उचित पानी नहीं जुटा पा रहे है। जिसके प्रभाव से लगातार किसानो की आत्महत्याओ में वृद्धि के साथ-साथ कम उपज के कारण महंगाई में वृद्धि हुयी है। मनुष्य अपनी इच्छाओ की पूर्ति के लिए वर्षा कराने वाले कारको को नष्ट करने में लगा हुआ है। जिस कारण आज हम पानी को भी खरीद कर पीने में मजबूर बने हुये है।
इन्सेट
अन्धाधुन्ध होती पेड़ो की कटान बना वर्षा में बाधा
महोबा। एक समय था जब हर स्थान हरा भरा पाया जाता था। लम्बे-लम्बे घने पेड़ तथा जंगल वर्षा को करने में अहम भूमिका निभाते थे। पेड़ो की अधिकता होने के कारण ही आॅक्सीजन की पर्याप्त मात्रा थी तथा प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिग जैसे खतरे परेशान नहीं कर रहे थे। परन्तु इंसान की लालच के कारण जंगलो को काटकर बड़ी-बड़ी कम्पनियां तथा घर मकान बनने के कारण आज पेड़ो की तादात मे कमी आयी है जिससे वर्षा कम हो रही है और पानी की कमी होती जा रही है।
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पहाड़ो को काटकर बना दिया व्यापार
महोबा। वर्षा के लिए सहायक बड़े-बड़े पहाड़ो को काटकर व्यापार में बढाने मे लगे हुये है। जितनी उचाई में पहाड़ है उतनी ही गहराई तक पहाड़ की कटान की जा रही है। ऐसे में हम पानी की मांग कैसे कर सकते है जब पानी के लिए आवश्यक कारको को ही नष्ट किया जा रहा है। आज का मनुष्य अपने अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहा है। जिस कारण ही पानी का स्तर और नीचे जाता जा रहा है। जानवर पक्षी पानी के लिए दर-दर भटकने को मोहताज है।
इन्सेट
जल के महत्व समझ उसके संरक्षण देना है ध्यान
महोबा। जल है तो कल है का वाक्य यूं ही नहीं बनाया गया है इसके पीछे जल की उपयोगिता को दर्शाया गया है। यदि आज भी हम जल को संरक्षित करने में ध्यान नहीं दे पाये तो आगामी समय मे स्वच्छ पानी के लिए भी भारी कीमते देने के लिए तैयार होना होगा। हर तरफ पक्की बनी सड़को के कारण जल का संचय हो पानी मुश्किल होता जा रहा है। कुएं सूखते जा रहे है हैण्डपम्प का जल स्तर कम होता जा रहा है। ऐसे संकेतो को ध्यान मे रखते हुये आवश्यक है कि जल को संरक्षित करना प्रारम्भ करें। जरूरत के आधार पर ही पानी का प्रयोग करे, ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं तथा लगातार हो रही पहाड़ो की कटानो को बन्द करवायें तभी आगे आने वाला कल सुरक्षित हो सकता है।