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समूह घ और ग में सगे संबंधियों को नौकरी देने में फंसे ये वन अफसर, जांच में सामने आई हेराफेरी


🗒 मंगलवार, मई 28 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

 वन विभाग में सितंबर 2016 में समूह ग और घ के तहत संविदा कर्मियों के विनियमितीकरण के मामले में उप क्षेत्रीय वन अधिकारी और प्रधान सहायक ने अपने पांच रिश्तेदारों को कागजों में हेरफेर कर नौकरी दे दी। आइजीआरएस पोर्टल पर आई शिकायत के बाद जांच में मामला सही पाया गया। इस पर क्षेत्रीय वन अधिकारी अनुसंधान केंद्र नवाबगंज कमलेश कुमार ने दोनों विभागीय अधिकारियों समेत पांचों कर्मियों के खिलाफ नवाबगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।क्षेत्रीय वन अधिकारी कमलेश कुमार ने बताया कि 12 सितंबर 2016 को कार्यालय वन वर्धनिक दक्षिणी क्षेत्र में समूह ग और घ के पदों पर संविदा एवं दैनिक मजदूरों के विनियमितीकरण समेत अन्य पदों की नियुक्तियां निकलीं थीं। इसके लिए प्रदेश भर से सैकड़ों आवेदन आए थे। उनके रखरखाव की जिम्मेदारी तत्कालीन अधिष्ठान शाखा प्रभारी रामचंद्र की थी। आवेदनों की जांच के लिए वरिष्ठतम वन क्षेत्राधिकारी और प्रभारी सहायक वन वर्धनिक नवाबगंज की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई थी।नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद मथुरा सिविल लाइंस निवासी राहुल सिंह ने आइजीआरएस के माध्यम से भर्ती में धांधली की शिकायत की कि प्रधान सहायक रामचंद्र और इटावा अनुसंधान केंद्र के तत्कालीन उपक्षेत्रीय वन अधिकारी राधेश्याम ने फर्जी दस्तावेजों से पांच सगे संबंधियों को नौकरी दे दी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दस्तावेजों में हेरफेर कर शाहजहांपुर के सेहरामऊ एठापुर के प्रदीप कुमार, शाहजहांपुर अल्लागंज के वीरेंद्र कुमार, शाहजहांपुर के सेहरामऊ भरगवां के सुरेंद्र कुमार, उन्नाव मौरावां के लच्छीखेड़ा के रमाकांत और इटावा इकदिल के सुरेश बाबू को भर्ती कर लिया गया।अधिकारियों के आदेश पर हुई जांच में भर्ती घोटाले खुलने पर कमलेश कुमार ने नवाबगंज थाने में प्रधान सहायक रामचंद्र, उपक्षेत्रीय वन अधिकारी राधेश्याम समेत कर्मचारी प्रदीप कुमार, वीरेंद्र कुमार, सुरेंद्र कुमार, रमाकांत और सुरेश बाबू के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग कर सरकारी नौकरी लेने आदि की धाराओं मामला दर्ज कराया। नवाबगंज के इंस्पेक्टर दिलीप बिंद ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है।

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