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उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने की मॉब लिंचिंग में विशेष कानून बनाने की सिफारिश, मौत होने पर मिले उम्र कैद


🗒 गुरुवार, जुलाई 11 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

झारखंड के तबरेज की भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग) में मौत के बाद पूरे देश में एक नई बहस शुरू हो गई है। भीड़ हिंसा के दोषियों पर अंकुश लगाने और सरकारी मशीनरी की जवाबदेही तय करने की मांग उठने लगी है। इस बीच उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने इस सिलसिले में प्रदेश सरकार से विशेष कानून बनाने की सिफारिश की है। आयोग के चेयरमैन न्यायमूर्ति एएन मित्तल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी अपनी 130 पेज की विस्तृत रिपोर्ट में भीड़ हिंसा से मौत होने पर उम्र कैद और पांच लाख रुपये जुर्माना की सिफारिश की है।आयोग ने भीड़ हिंसा में नाकाम रहने पर डीएम और एसपी को भी जिम्मेदार ठहराते हुए दंड का प्रावधान किये जाने की सिफारिश की है। कहा है कि अगर पुलिस अधिकारी पीड़ित व्यक्ति या परिवार को जानबूझकर सुरक्षा देने में लापरवाही करता या मुकदमा दर्ज नहीं करता है तो उस पुलिस अधिकारी को तीन वर्ष की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना होना चाहिए।इसी तरह जिलाधिकारी भी यदि पीड़ित व्यक्ति की जानबूझ कर उपेक्षा करते और सुरक्षा प्रदान नहीं करते तो तीन वर्ष की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना का प्रस्ताव है। आयोग ने इस कानून को लागू करने की तत्काल सिफारिश की है। सरकार अगर इस कानून को लागू करती है तो मणिपुर के बाद भीड़ हिंसा पर नियंत्रण के लिए कानून बनाने वाला उत्तर प्रदेश दूसरा राज्य होगा।

उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने की मॉब लिंचिंग में विशेष कानून बनाने की सिफारिश, मौत होने पर मिले उम्र कैद

यह है सिफारिश

  • मामूली चोट आने पर : सात वर्ष की सजा, एक लाख रुपये जुर्माना
  • गंभीर चोट आने पर : दस वर्ष की सजा, तीन लाख रुपये जुर्माना 
  • मौत होने पर : आजीवन कारावास, पांच लाख रुपये जुर्माना 
  • राज्य में 2012 से 2019 तक भीड़ हिंसा की 50 घटनाएं हुईं, जिनमें 11 मौतें भी हुई हैं। इनमें हमले के 25 बड़े मामले थे। इनमें गो-रक्षकों के भी मामले हैं। समाजवादी पार्टी की हुकूमत में गौतमबुद्धनगर जिले के बिसाहड़ा में गोमांस खाने के आरोप में भीड़ द्वारा एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। अभी हाल में ऐसे ही एक मामले में उत्तेजित भीड़ ने पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या कर दी। उन्नाव, हापुड़, फर्रुखाबाद, मुजफ्फरनगर, गाजीपुर और कानपुर आदि कई जिलों में भीड़ हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। आयोग ने ऐसे मामलों में षडयंत्र रचने, भीड़ को उकसाने, आरोपितों की सहायता करने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने पर भी कानून बनाने पर जोर दिया है।

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