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उन्नाव की दुष्कर्म पीड़िता के नाना व मामा सहित नौ को मिली सुरक्षा


🗒 गुरुवार, अगस्त 15 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

उन्नाव के माखी गांव की दुष्कर्म पीड़ित के रायबरेली में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद विधायक कुलदीप सिंह सेंगर अब सुप्रीम कोर्ट की रडार पर हैं। उन्नाव दुष्कर्म कांड के साथ ही पीड़ित के सड़क दुर्घटना में घायल होने के मामले में सीबीआइ ने जांच तेज कर दी है। सेंगर पर दुष्कर्म के साथ ही दुर्घटना में पीड़ित को मारने के आरोप तय करने के साथ ही सीबीआई ने पीड़ित के रिश्तेदारों तथा गवाहों की सुरक्षा भी काफी कड़ी कर दी है।सीबीआइ की टीम रायबरेली के अटौरा गांव के बाद पीड़ित के हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद खासी सतर्कता बरत रही है। पीड़ित के नजदीकी लोगों की सुरक्षा के लिहाज से एलआइयू से रिपोर्ट मांगी गई। जिस पर पीड़ित के तीन नजदीकी परिवार वालोंं समेत नौ लोगों को सुरक्षा मुहैया करा दी गई है।उन्नाव में बांगरमऊ विधायक कुलदीप सेंगर को आरोपित करने के बाद कोर्ट के दुष्कर्म पीड़ित का जन्म प्रमाण पत्र मांगा गया। उस वक्त प्रमाण पत्र निर्गत करने वाले अधिकारी समेत शिक्षक, खंड शिक्षा अधिकारी को सुरक्षा प्रदान कर दी गई। पीड़ित के नाना और दो मामा की सुरक्षा भी पुलिस ने संभाल ली है। आठ अगस्त को एलआइयू ने रिपोर्ट दी थी, जिस पर बुधवार को नाना, दो मामा, स्कूल के प्रधानाध्यापक, दो शिक्षक, तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव और दो खंड शिक्षा अधिकारी को गनर मुहैया करा दिया है।दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म केस के मुख्य आरोपित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर पॉक्सो के एक्ट तहत नए सिरे से आरोप तय करने के निर्देश दिए हैं। अब सेंगर के ऊपर पॉक्सो एक्ट की धारा 5(सी) के तहत भी आरोप तय हुए हैं। इसमें दोषी पाए जाने पर दस साल तक की सजा का प्रावधान है।कोर्ट के निर्देश के बाद संबंधित धारा को पॉक्सो की धारा 6 के साथ जोड़कर देखा जाएगा। इस धारा के तहत सरकारी कर्मचारी ने नाबालिग से दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। दरअसल सेंगर विधायक हैं और राज्य कर्मचारी के श्रेणी में आते हैं। सेंगर के खिलाफ अब लोकसेवक द्वारा नाबालिग से दुष्कर्म का भी केस चलेगा। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 10 साल की सजा का प्रावधान है।न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने सेंगर पर तय हुए आरोपों में परिवर्तन करते हुए कहा कि राजकीय कर्मचारी को व्यापक अर्थ में समझने की जरूरत है। इसका आशय शक्ति, अधिकार अथवा विश्वास से है। अगर कोई विधायक किसी नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में दोषी पाया जाता है तो उस पर पॉक्सो की संबंधित धारा 5(सी) व 6 के तहत आरोप तय किया जाएगा। इससे पहले कोर्ट ने सेंगर व शशि सिंह के खिलाफ पॉक्सो की धारा 3 व 4 के तहत आरोप तय किए थे। अब मामले की सुनवाई बंद कमरे में होगी और मीडिया के मौजूद रहने पर रोक रहेगी। बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पीड़ित की हालत पर सीबीआई को सीलबंद रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया। 

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