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टोल प्लाजा बना उज्ज्ड कर्मचारियों का अड्डा


🗒 बुधवार, सितंबर 30 2020
🖋 चित्रभान केशव अग्निहोत्री, ब्यूरो प्रमुख कानपुर
टोल प्लाजा बना उज्ज्ड कर्मचारियों  का अड्डा

उत्तर प्रदेश -  फतेहपुर जनपद NH2 पर होने के कारण दो टोल प्लाजा से घिरा हुआ है।* जबकि तीसरा टोल प्लाजा बांदा सागर मार्ग पर है। *मगर यहां का माहौल गजब है साहब! मानो बदतमीजी बदजुबानी और गाली गलौज का लाइसेंस यहां के कर्मचारियों को मिल गया हो।* टोल प्लाजा से होकर स्थानीय लोगों का आना जाना होता रहता है। स्थानीय होने के कारण नोकझोंक का होना स्वाभाविक है पर कर्मचारियों का किसी व्यक्ति पर एक साथ टूट पड़ना और उसे विभिन्न प्रकार की गालियों से नवाजना यहां का रोजमर्रा का खेल हो गया है। स्थानी पुलिस भी स्थानीय लोगों का साथ ना दे कर टोल प्लाजा के कर्मचारियों का ही साथ दे कर उनका हौसला अफजाई करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ती।बल्कि स्थानीय पुलिस कर्मचारियों से मिली हुई होती है़ टोल प्लाजा केंद्र सरकार* द्वारा प्राप्त निर्देशों का पालन करने का दावा जरूर करता है लेकिन सच यह है कि यहां केंद्र सरकार के ही आदेशों की धज्जियां खुलेआम उड़ाई जाती है और स्थानीय लोगों को बेइज्जत किया जाता है। ना तो यहां के कर्मचारियों की पहचान की जा सकती है और ना ही इन्हें रखने से पहले इनके चरित्र का ही प्रमाण पत्र पुलिस प्रशासन से लिया जाता है। टोल प्लाजा में काम करने वाले कर्मचारियों का यूनिफॉर्म भी नहीं है। कहने का मतलब कर्मचारी यूनिफॉर्म में नहीं रहते न ही ये कर्मचारी नेम प्लेट ही लगाते हैं। गाली गलौज करने वाले ऐसे कर्मचारियों की पहचान भी नहीं की जा सकती। एंबुलेंस से लेकर क्रेन और टोल प्लाजा में भी अन्य सुविधाओं का होना दूर की बात लगती है।केंद्र सरकार टोल प्लाजा* में जाम ना लगने की बात बार-बार कहती रहती है लेकिन यहां का जाम लाइलाज है नियमों का पालन न करने वाले कर्मचारियों के ही चलते जाम में फंसना वाहनों के लिए आम बात है। यदि इसी बीच किसी वाहन के चालक या फिर मालिक से वाद विवाद हो गया तो फिर टोल प्लाजा के कर्मचारी का तेवर देखते ही बनता है। बिना यूनिफार्म और विना नेम प्लेट के यह कर्मचारी पहुंचते ही गाली गलौज बदतमीजी शुरू कर देते हैं । गैर जनपद के है तो यहां की यादों को समेटे हुए अपने गृह जनपद चले जाते है। लेकिन यदि यही वाहन जनपद का है तो फिर नोकझोंक होना स्वाभाविक है यह नोकझोंक कभी-कभी बड़ा रूप ले लेती है बिना नेम प्लेट और यूनिफॉर्म के कर्मचारी अपनी ताकत का एहसास कराने में तनिक भी चूक नहीं करते। अब जब गाली गलौज करने वाले कर्मचारियों की पहचान ही नहीं है तो फिर शिकायत किसकी करें। कभी-कभी तो इन कर्मचारियों की बदजुबानी के शिकार पुलिस वाले भी हो जाते हैं।सवाल जिला प्रशासन* से है कि टोल प्लाजा में काम करने वाले कर्मचारियों को यूनिफार्म के साथ नेम प्लेट लगाकर ड्यूटी करने के लिए निदेशक करें और इनका चरित्र प्रमाण पत्र भी लिया जाए,जिससे टोल प्लाजा में होने वाली घटनाओं में शामिल कर्मचारियों की पहचान की जा सके विना वर्दी नेम प्लेट के कर्मचारियों की करना मुश्किल है़ । 

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