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ऑटो सवार बदमाश परदेसियों को लूट का शिकार बनाते थे. गिरफ्तार


🗒 सोमवार, अगस्त 08 2022
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
ऑटो सवार बदमाश परदेसियों को लूट का शिकार बनाते थे.  गिरफ्तार

वाराणसी। बनारस नगरी का नाम खराब करने के लिए ऑटो सवार बदमाशों ने अपनी तरफ से खूब लूटपाट मचाया। और लूटपाट करने के बाद पीड़ितों को जमकर मारा पीटा भी। अन्य भुक्तभोगी तो मुकदमा और पुलिस की मदद से दूर रहे। लेकिन 27 जुलाई और और 5 अगस्त की लूट की घटना के शिकार श्याम नारायण यादव और आशीष सिंह ने कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया। जिस पर कैंट अर्दली बाजार के चौकी प्रभारी सुनील कुमार गौड़ और कैंट थाने के क्राइम इंचार्ज हिमांशु त्रिपाठी ने सीसी फुटेज और सर्विलांस की मदद से लुटेरों को धर दबोचा।वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस अड्डा के यात्रियों को लूटने वाले गिरोह के छह बदमाशों को कैंट पुलिस ने अनौला से गिरफ्तार किया है। कब्जे से लूट के नौ मोबाइल, आभूषण, नगदी और लूट में उपयोग दो ऑटो को पुलिस ने बरामद किया।डीसीपी वरुणा आरती सिंह के अनुसार गिरफ्तार मनीष कुमार धरिकार, राजा उर्फ विजय सिंह, आशीष साहनी मतल उर्फ कल्लू, रिंकू कुमार, सुनील कुमार चौरसिया और रवि कुमार भारती सभी कांशीराम आवास शिवपुर के निवासी हैं। पुलिस की पूछताछ में सभी ने बताया कि वह कैंट स्टेशन और रोडवेज बस अड्डा से रात के समय यात्रियों को ऑटो में सवारी के नाम पर बिठाते थे और रास्ते में सुनसान स्थान देख मारपीट कर सामान और नगदी लूट लेते थे।घटना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीसीपी वरुणा आरती सिंह, एसीपी कैंट लखन सिंह यादव के द्वारा जानकारी दी गई। गिरफ्तार करने वाले पुलिस कर्मियों में प्रमुख भूमिका निभाने वाले अर्दली बाजार चौकी प्रभारी सुनील कुमार गौड़, प्रशिक्षु दरोगा हिमांशु त्रिपाठी, विनोद कुमार मिश्रा, विवेक सिंह, राजकुमार पांडेय, राजकुमार ,ब्रिज बिहारी ओझा, दुर्ग विजय, सचिन मिश्रा, राहुल सिंह यादव, दिलीप निषाद, प्रमोद चौहान,जितेंद्र यादव प्रमुख रूप से शामिल रहे।पूछताछ में बदमाशों ने बताया कि कैंट स्टेशन के आसपास ऑटो में एक चालक और एक सवारी बनकर बदमाश बैठे रहते थे। सामने से आने वाले यात्री को जहां जाना रहता था, वही जाने की बात बता कर विश्वास में लेते हुए भाड़ा बताया जाता था। उसके बाद कुछ कदम आगे चलते ही अन्य दो साथी बदमाश भी सवारी बन कर बैठ जाते थे। और सुनसान जगह देखकर पहले यात्री को लूटते थे। उसके बाद डंडे से जमकर मारते पीटते थे। खासतौर पर पैर पर इसलिए मारते थे ताकि वह जब तक किसी को बताने के लिए पहुंचे तब तक बदमाश भाग चुके रहे।

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