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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद तबियत बिगड़ने की बात पर कुंभ से काशी रवाना हो गए


🗒 गुरुवार, फरवरी 14 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए रामाग्रह यात्रा निकालने की घोषणा कर चुके शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती अचानक काशी चले गए। बताया जा रहा है कि उन्हें फेफड़े में संक्रमण की समस्या है, जिसके चलते उन्हें बीएचयू के आइसीयू में भर्ती कराया गया है। इधर शंकराचार्य पर प्रशासन यात्रा न निकालने का दबाव बना रहा था। इसके मद्देनजर मंडलायुक्त डॉ. आशीष गोयल व पुलिस अधिकारी गुरुवार की सुबह शंकराचार्य को मनाने मनकामेश्वर मंदिर गए थे। वहां अयोध्या से आए अधिकारी भी डटे थे। अधिकारियों का दबाव बढऩे पर शंकराचार्य दोपहर एक बजे काशी रवाना हो गए। वह 17 फरवरी की सुबह प्रयाग आकर यात्रा में शामिल होंगे।

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद तबियत बिगड़ने की बात पर कुंभ से काशी रवाना हो गए

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कुंभ क्षेत्र में हुई परमधर्म संसद में 21 फरवरी को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास करने की घोषणा की थी। वह 17 फरवरी को रामाग्रह यात्रा निकालकर अयोध्या रवाना होने वाले हैं। यात्रा का प्रतापगढ़ व सुलतानपुर में प्रवास होने के बाद 20 फरवरी को अयोध्या पहुंचना है। संतों और कई संगठनों ने शंकराचार्य को समर्थन देते हुए अयोध्या जाने की तैयारी में लगे हैं। शंकराचार्य के शिष्य व मनकामेश्वर मंदिर प्रभारी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि गुरुजी पर अधिकारी लगातार अयोध्या न जाने का दबाव बना रहे थे। मंडलायुक्त सहित कई पुलिस व प्रशासन के अधिकारी उन्हें सुबह से घेरे थे, जिसके चलते वह असहज महसूस करने लगे। उनका स्वास्थ्य भी खराब था, जिसके चलते वह काशी चले गए हैं, लेकिन रामाग्रह यात्रा बंद नहीं होगी। वह 17 फरवरी को काशी से प्रयाग आकर यात्रा शुरू करेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के प्रयाग आगमन का असर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की रामाग्रह यात्रा पर दिखने लगा है। अमित शाह ने खुलकर किसी से कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके सामने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के समस्त पदाधिकारियों व अखाड़ों के महात्माओं से स्वरूपानंद की रामाग्रह यात्रा में अयोध्या न जाने का आग्रह किया था। योगी ने कहा था कि राम मंदिर निर्माण का हल निकाला जा रहा है, आप लोग अयोध्या न जाएं। यह वो महात्मा थे, जिन्होंने विहिप की धर्म संसद का विरोध व स्वरूपानंद की रामाग्रह यात्रा का समर्थन किया था। योगी की अपील के बाद महात्मा अयोध्या न जाने का मन बना रहे थे। इधर प्रशासन ने भी स्वरूपानंद पर दबाव बना दिया, जिससे उन्हें प्रयाग से जाना पड़ा।जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के आंदोलन से प्रतापगढ़ के जुडऩे पर यहां का खुफिया तंत्र सक्रिय है। उनका कार्यक्रम आते ही पुलिस-प्रशासन की खुफिया इकाई लगातार आयोजन व स्वागत समिति के संपर्क में है। यात्रा के स्वरूप और साथ रहने वाले संतों आदि की जानकारी जुटाई जा रही है। 

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