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गोरखपुर में बेसिक शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर मरने के पांच माह बाद तक शिक्षक को मिलता रहा वेतन


🗒 सोमवार, जुलाई 29 2019
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक

बेसिक शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। चरगांवा क्षेत्र की एक महिला शिक्षक के निधन के पांच महीने बाद तक भी विभाग वेतन जारी करता रहा। जुलाई महीने में जब किसी ने इस बात की जानकारी दी तो आनन-फानन रिकवरी की कार्यवाही शुरू की जा रही है। इस घटना ने शिक्षकों की हाजिरी और वेतन निकलने की पूरी प्रक्रिया की पोल खोल कर रख दी है। साथ ही आंख मूंद कर शिक्षकों की उपस्थिति प्रमाणित करने की लचर कार्यशैली भी उजागर हुई है।चरगांवा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय अराजी छत्रधारी में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत रहीं अनुराधा का जनवरी 2019 में निधन हो गया। लेकिन, फरवरी से जून महीने तक उनका वेतन पहले की तरह ही जारी होता रहा। करीब पांच दिन पहले एक व्यक्ति ने बेसिक शिक्षा विभाग में इस बात की जानकारी दी कि एक मृत महिला शिक्षक का वेतन जारी हो रहा है। यह जानकारी होते ही कार्यालय में हड़कंप मच गया और जल्दी-जल्दी मामले की लीपापोती शुरू हो गई।भले ही वेतन दिवंगत शिक्षक के खाते में गया हो लेकिन यह गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। लेखा विभाग के जिम्मेदार बताते हैं कि उन्हें जो वेतन बिल मिलता है, उसी के अनुसार वेतन जारी करते हैं। कभी महिला के निधन के बारे में बताया ही नहीं गया। शिक्षा विभाग इस मामले में रिकवरी की कार्यवाही कर रहा है और इसी के साथ इस बड़ी लापरवाही को 'भूलÓ मानकर भूल जाने की तैयारी भी।वेतन के लिए एक स्कूल के सभी शिक्षकों का प्रारूप नौ पर महीने भर का हस्ताक्षर कराया जाता है। उसी पर मेडिकल लीव, आकस्मिक अवकाश आदि भी दर्ज होता है। प्रधानाध्यापक इस ब्लॉक संसाधन केंद्र भेज देते हैं। यह आम चर्चा है कि प्रारूप नौ को बीआरसी पर जांचा ही नहीं जाता, इस घटना से यह चर्चा प्रमाणित भी हुई है। खंड शिक्षा अधिकारी की ओर से परंपरागत रूप से वेतन के लिए फाइल आगे बढ़ा दी जाती है।मामला संज्ञान में आया है। महिला शिक्षक के खाते में उनके निधन के बाद भी वेतन गया है, उसकी रिकवरी के लिए लिखा गया है। - भूपेंद्र नारायण सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

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