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निवेश की योजना के बाद भी पूर्वांचल निगम का निजीकरण स्वीकार्य नहीं


🗒 सोमवार, सितंबर 14 2020
🖋 विक्रम सिंह यादव, प्रधान संपादक
निवेश की योजना के बाद भी पूर्वांचल निगम का निजीकरण स्वीकार्य नहीं
ब्यूरो चीफ संदीप विश्वकर्मा वाराणसी
वाराणसी - विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रबंध निदेशक कार्यालय भिखारीपुर पर  निजीकरण के खिलाफ आज चौदहवें दिन भी वाराणसी के समस्त बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया | संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने उ०प्र० विद्युत नियामक आयोग को अगले पांच वर्षों में अंडरग्राउंड केबलिंग, स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग, कृषि फीडर, स्काडा, बिजली चोरी पर लगाम,डिमांड फोरकास्टिंग जैसे  सुधार कार्यक्रम पर 8800 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव दिया है जिसमें से 7126 करोड़ रुपए केंद्रीय सेक्टर का अनुदान है | विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने इतने बड़े स्तर पर सुधार कार्यक्रम शुरू करने के बाद भी पूर्वांचल निगम को निजी हाथों में सौंपने के गलत प्रयासों पर सवाल उठाए हैं | वक्ताओं ने कहा कि पांच अप्रैल 2018 को ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की उपस्थिति में पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने संघर्ष समिति से समझौता किया है कि प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र में कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा। ऐसे में अब निजीकरण की बात करना समझौते का खुला उल्लंघन है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा निगमों में कहीं भी निजीकरण करने की कोशिश हुई तो बिजली कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल एवं परिवार सहित जेल भी भरने को बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि नौकरशाही के दबाव में किया गया बिजली बोर्ड का विघटन और निगमीकरण पूरी तरह विफल रहा है। वर्ष 2000 में बिजली बोर्ड के विघटन के समय मात्र 77 करोड़ रुपये का सालाना घाटा था, जो अब 95000 करोड़ रूपये से अधिक हो गया है। इसके बावजूद विद्युत परिषद के पुनर्गठन पर पुनर्विचार करने के बजाए प्रबंधन निजीकरण का प्रस्ताव देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना चाहता है जिससे बिजली कर्मियों में भारी रोष है। उत्तर प्रदेश कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति ने सरकारी संस्थाओं एवं उपक्रमों के अंधाधुंध निजीकरण पर नाराजगी व्यक्त की है और निजीकरण के फैसले के खिलाफ जारी बिजली कर्मियों के आन्दोलन को हर तरह से समर्थन करने की घोषणा की है समिति ने कहा है कि इससे कामगार वर्गों में असंतोष और असुरक्षा की भावना व्याप्त हो रही है सभा को सर्वश्री इं चंदेश्वर सिंह, इं  सुनील कुमार यादव, इं संजय भारती, मायाशंकर तिवारी, ए०के० श्रीवास्तव, जगदीश पटेल, नीरज बिंद, जीउत लाल, राजेन्द्र सिंह, अंकुर पाण्डेय, सोहनलाल, रमन श्रीवास्तव, वीरेंद्र सिंह, जमुना पाल, रमाशंकर पाल, गुलाब प्रजापति, हेमंत श्रीवास्तव, संतोष वर्मा, अमित श्रीवास्तव, सौरभ पाठक आदि ने संबोधित किया

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